इसी वजह से कई अन्य गांव भी पलावित हो गये हैं. उन्होंने यह भी बताया कि बाढ़ तथा कटाव का जायजा लेने के लिए अगले महीने की 21 तारीख को केंद्रीय टीम आयेगी. इस बीच, बाढ़ प्रभावित इलाकों में जिला प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव कार्य जोर-शोर से जारी है. जिन लोगों का घर गंगा के गर्व में समा गया है उन्हें विभिन्न स्कूलों में बने अस्थायी शिविरों में रखा गया है. इस बीच, राहत एवं बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ को लगाया गया है. श्री द्विवेदी ने कहा कि एनडीआरएफ की एक टीम सबसे अधिक प्रभावित मानिकचक तथा कालियाचक-3 ब्लॉक में राहत एवं बचाव कार्य कर रही है.
इसके अलावा कुछ स्वयंसेवी संगठन भी बाढ़ राहत के कार्य में जुटे हुए हैं. बाढ़ से हालांकि किसी के मारे जाने की कोई खबर नहीं है. दो लोगों की मौत पहले ही हो चुकी है. जिला अधिकारी ने आगे कहा कि बाढ़ की परिस्थिति पर नजर रखने के लिए एक कंट्रोल रूम की स्थापना की गयी है. 24 घंटे इसी कंट्रोल रूम से बाढ़ की परिस्थिति पर निगरानी की जायेगी. उन्होंने इस विषम परिस्थिति में सभी से सहयोग करने की अपील की है.
इधर, कालियाचक-3 ब्लॉक के बिन नगर-1 ग्राम पंचायत इलाके में गंगा के कटाव से सैकड़ों परिवार बेघर हो गये हैं. इन सभी लोगों का घर गंगा में समा गया है. शनिवार को इस इलाके के दौरे पर माकपा के पूर्व विधायक विश्वनाथ घोष तथा अन्य माकपा नेता पहुंचे. इन लोगों ने कटाव प्रभावितों के पुनर्वास की मांग की है. श्री घोष ने कहा कि जिन लोगों का घर गंगा में समा गया है, उन्हें जमीन देकर घर बना देने की मांग राज्य सरकार से की गई है. उल्लेखनीय है कि गंगा के कटाव में वैष्णवनगर के भाजपा विधायक स्वाधीन सरकार भी बेघर हो गये हैं. उनका घर भी गंगा में विलीन हो गया है. वह परिवार सहित अपने एक मित्र के घर शरण लिये हुए हैं. उनके भाई तथा परिवार के अन्य सदस्य भी रिश्तेदारों के घरों पर डेरा जमाए हुए हैं.
