जलपाईगुड़ी. एक समय जो लोग भारत के स्वतंत्रता दिवस का विरोध करते हुए 15 अगस्त को उत्तर बंगाल और असम में बंद बुलाते थे, वे इस बार खुद देश की आजादी का जश्न मनाने जा रहे हैं. कामतापुर लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (केएलओ) के पूर्व उग्रवादियों ने इस बार खुद से स्वतंत्रता दिवस मनाने की पहल की है. 28 दिसंबर, 1993 को अलीपुरद्वार जिले के जिस मध्य हलदीबाड़ी में केएलओ का गठन हुआ था, इस बार उसी गांव में 15 अगस्त को स्वाधीनता दिवस का आयोजन किया जा रहा है. केएलओ की अग्रिम पंक्ति के पूर्व सदस्यों ने 15 अगस्त के इस समारोह के लिए केएलओ के फरार चल रहे संस्थापक अध्यक्ष जीवन सिंह उर्फ तमीर दास की दो बहनों और राज्य के आदिवासी मंत्री जेम्स कुजूर को आमंत्रित किया है.
पिछले कई दिनों से कुमारग्राम ब्लॉक के हलदीबाड़ी में पूर्व डिप्टी कमांडर मिल्टन वर्मा, हर्षवर्धन दास, टारजन उर्फ मधुसूदन दास जैसे पहली पंक्ति के 34 पूर्व केएलओ सदस्य और 41 पूर्व लिंकमैन कुमारग्राम के उत्तर हलदीबाड़ी के ईश्वरवाणी क्लब में स्वधानीता दिवस समारोह की तैयारी को लेकर बार-बार बैठक कर रहे हैं. मिल्टन ने बताया कि वे लोग इस बार केएलओ चीफ रहे जीवन सिंह के घर के सामने ही मध्य हलदीबाड़ी के चिला राय क्लब मैदान में स्वधीनता दिवस समारोह का आयोजन करेंगे. कार्यक्रम में जीवन सिंह की दो बहनों सुमित्रा वर्मन और वृष्टिमाला राय को भी समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है. इस दिन सभी जीवन सिंह को सरकार के साथ बातचीत की मेज पर लाने और आत्मसमर्पण कराने के लिए शपथ लेंगे. उग्रवादी की जिंदगी ने उन्हें कुछ नहीं दिया. घर-परिवार को भी वे नहीं देख पाये. अब आत्मसमर्पण करनेवाले इन चीजों पर ध्यान देना चाहते हैं.
1993 से 2003 तक केएलओ के भूटान, असम, म्यांमार और बांग्लादेश में प्रशिक्षण शिविर चलते थे. वाम नेताओं की हत्या और व्यवसायियों का अपहरण आये दिन की बात थी. लेकिन भूटान सेना ने जब सन 2003-04 में ‘ऑपरेशन फ्लैश आउट’ चलाया तो मिल्टन और हर्षवर्धन आदि धर दबोचे गये. 2011 तक इन लोगों ने एक-एक कर विभिन्न मामलों में जमानत पायी और कुछ निर्दोष साबित हुए. इसके बाद जेल से बाहर आने के बाद ये लोग आम आदमी की तरह जीवन बिता रहे हैं.
कुमारग्राम के तृणमूल विधायक तथा आदिवासी मंत्री सह पूर्व पुलिस अधिकारी जेम्स कुजूर ने बताया कि लंबा उग्रवादी जीवन बिताने के बाद उनकी यह पहल स्वागतयोग्य है. वह समारोह में शामिल होंगे.
उल्लेखनीय है कि जीवन सिंह 2003 में भी पुलिस के हाथों नहीं आया था और अब भी फरार है. बताया जाता है कि वह बोडो उग्रवादियों के साथ मिलकर केएलओ का उग्रवादी आंदोलन चला रहा है. लेकिन उसके पुराने साथियों ने रास्ता बदल लिया है. एक समय मिल्टन, हर्षवर्धन जैसे केएलओ कमांडरों के हाथों में एके-47 राइफल और रॉकेट लांचर जैसे हथियार रहते थे और वे देश विरोधी काम करते हुए हर साल 15 अगस्त का बहिष्कार करते हुए बंद का पालन करते थे. लेकिन यही लोग अब आम लोगों की तरह 15 अगस्त को तिरंगा फहरायेंगे और उनके कंठ से राष्ट्रगान के सुर फूटेंगे.
