बर्मिंघम में प्रदर्शित होंगे जलपाईगुड़ी के विश्वजीत के शिल्प

जलपाईगुड़ी: चुनाव के काफी पहले से ही राजनीतिक हलके में कामदुनी नारी उत्पीड़न की घटना ने जोर पकड़ रखा था. बीते विधानसभा चुनाव में विरोधी दलों ने इसे एक बड़ा मुद्दा भी बनाया था. लेकिन अब इस घटना पर कोई राजनीतिक दल बात नहीं कर रहा है. लेकिन अब जलपाईगुड़ी के शिल्पी विश्वजीत घोष के […]

जलपाईगुड़ी: चुनाव के काफी पहले से ही राजनीतिक हलके में कामदुनी नारी उत्पीड़न की घटना ने जोर पकड़ रखा था. बीते विधानसभा चुनाव में विरोधी दलों ने इसे एक बड़ा मुद्दा भी बनाया था. लेकिन अब इस घटना पर कोई राजनीतिक दल बात नहीं कर रहा है. लेकिन अब जलपाईगुड़ी के शिल्पी विश्वजीत घोष के दो शिल्पों ‘कामुदनी’ और ‘वांट’ के जरिये कामदुनी और बंद चाय बागानों में भुखमरी झेल रहे श्रमिकों का मुद्दा देश की सीमाओं के बाहर पहुंच गया है. इन दोनों शिल्पों को बर्मिंघम अंतरराष्ट्रीय आर्ट गैलरी में प्रदर्शित किया जायेगा.
जलपाईगुड़ी के किरानी पाड़ा में विश्वजीत घोष का अपना वर्कशॉप है. राजुआना नामक यह वर्कशॉप खादी बोर्ड के सहयोग से बना राज्य का अकेला फाइन आर्ट वर्कशॉप है. यह सन 2013-14 में स्थापित हुआ था. इसके जरिये विश्वजीत ने कई युवकों के लिए रोजगार की व्यवस्था भी की है. शांतिनिकेतन में दाखिले का अवसर नहीं मिलने पर उन्होंने विभिन्न कलाकारों के सान्निध्य में सन 1995 से लेकर चार साल तक काम सीखा. उन्होंने बीते सालों में राज्य में घटी कई दुखद घटनाओं पर शिल्प बनाया है. शिल्पों की इस शृंखला को उन्होंने ‘ब्लैक जर्नी’ नाम दिया है. इसके निर्माण में सबकुछ काला ही इस्तेमाल किया जाता है. कामदुनी का शिल्प भी काले रंग के फाइबर ग्लास से बना है. शिल्प में एक निर्वस्त्र युवती को दिखाया गया है, जिसके हाथ-पैर जंजीर से बंधे हैं, पूरे शरीर पर धारदार हथियारों के जख्म हैं और दो कुत्ते मृत या मृतप्राय युवती के शरीर को नोच खा रहे हैं. कला की भाषा में दो कुत्ते दो हिंसक पुरुषों के प्रतीक हैं, जो स्त्री के यौवन को रौंदकर उसका आस्वादन कर रहे हैं.
ब्लैक जर्नी का एक और शिल्प है ‘वांट’. विश्वजीत बीते कई सालों से अपने जिले जलपाईगुड़ी के विभिन्न बंद चाय बागानों में श्रमिकों को भूख और आधापेट खाने के चलते मरते देख रहे हैं. आज भी कई चाय बागान बंद पड़े हैं. श्रमिकों की दुर्दशा अब भी खत्म नहीं हुई है. काले फाइबर ग्लास बने वांट शिल्प में उन्होंने हड्डियों का ढांचा बन गया एक शरीर दिखाया है, जिसके तन पर कपड़ा नहीं है और वह दोनों हाथ ऊपर उठाकर भोजन चाह रहा है. प्रदर्शनी के समय शिल्प के ऊपर रस्सियों से कई रोटियां झुलायी जायेंगे, जो शिल्प को जीवंत बना देगा.
विश्वजीत ने बताया कि केंद्र सरकार के खादी ग्रामोद्योग आयोग के माध्यम से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत फाइन आर्ट पर आधारित राजुवाना वर्कशॉप बनाया गया है. सरकारी सहायता प्राप्त अपनी तरह का यह राज्य में पहला वर्कशॉप है. बैंक से उन्हें कर्ज मिलता है. अगले साल 2017 में 7 से 11 फरवरी तक ब्रिटेन के बर्मिंघम में एक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी है. इसमें हिस्सा लेनेवाले वह पूरे राज्य से अकेले हैं. वहां से जाने से पहले इस साल नवंबर, दिसंबर में वह ब्लैक जर्नी का प्रदर्शन राज्य के विभिन्न जिलों में करेंगे.

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