तृणमूल के हल्लाबोल से सिलीगुड़ी नगर निगम सरगर्म

सिलीगुड़ी. अशोक भट्टाचार्य कुरसी छोड़ो के नारे से सोमवार को एक बार फिर सिलीगुड़ी नगर निगम कार्यालय परिसर गूंज उठा. निगम में विरोधी दल तृणमूल कांग्रेस ने बड़े ही ताम-झाम के साथ मेयर अशोक भट्टाचार्य के पदत्याग की मांग पर आंदोलन किया. हांलाकि उनकी सारी मेहनत पर पानी फिर गया. अशोक भट्टाचार्य के इस्तीफे की […]

सिलीगुड़ी. अशोक भट्टाचार्य कुरसी छोड़ो के नारे से सोमवार को एक बार फिर सिलीगुड़ी नगर निगम कार्यालय परिसर गूंज उठा. निगम में विरोधी दल तृणमूल कांग्रेस ने बड़े ही ताम-झाम के साथ मेयर अशोक भट्टाचार्य के पदत्याग की मांग पर आंदोलन किया. हांलाकि उनकी सारी मेहनत पर पानी फिर गया.

अशोक भट्टाचार्य के इस्तीफे की मांग से ज्ञापन उन्हें ही सौंपने का तृणमूल का फार्मूला फेल हो गया. ज्ञापन ना सौंप पाने के झल्लाये विरोधी दल के नेता नांटू पाल ने अशोक भट्टाचार्य के मेयर रहते उनके कक्ष में प्रवेश नहीं करने का ऐलान कर दिया. इसके साथ तृणमूल वार्ड पार्षद कृष्णचंद्र पाल ने और रंजन सरकार ने धमकी भरे स्वर में कहा कि मेयर के इस वर्ताव पर उन्हें घर जाने से भी रोका जा सकता है.

निगम के कमिश्नर सोनम वांग्दी भूटिया से शिकायत करते हुए इन्होंने कहा कि अनुमति देने के बाद मेयर ने कक्ष में प्रवेश करने नहीं दिया. अब बिना किसी अनुमति के उनके कक्ष में प्रवेश किया जायेगा. कृष्णचंद्र पाल ने कहा का काफी जल्द सिलीगुड़ी को असभ्य मेयर से छुटकारा मिल जायेगा. इधर निगम और मेयर की सुरक्षा के लिये सिलीगुड़ी थाना प्रभारी देवाशीस बोस पुलिस टीम के साथ निगम में उपस्थित थे.


पूर्व निर्धारित योजना के तहत सोमवार को सिलीगुड़ी नगर निगम में विरोधी दल तृणमूल कांग्रेस मेयर के इस्तीफे की मांग पर एकजुट हुयी. बाघाजतीन पार्क से रैली कर तृणमूल वार्ड पार्षद और समर्थक निगम परिसर में एकत्रित हुए. माकपा बोर्ड के खिलाफ काफी नारेबाजी हुयी. मेयर तुम कुरसी छोड़ो की आवाज से नगर निगम गूंज उठा. इसके बाद तृणमूल के वार्ड पार्षद औैर समर्थक नारे लगाते हुए मेयर कक्ष के बाहर पहुंचे. मेयर अशोक भट्टाचार्य पहले से ही अपने मेयर परिषद और माकपा वार्ड पार्षदों के साथ बैठे थे. मेयर कक्ष में मेयर परिषद सदस्य और माकपा वार्ड पार्षदों को देखकर आंदोलनकारी पार्षद झल्ला उठे. आंदोलनकारियों के कक्ष के बाहर जमा होने की जानकारी सिलीगुड़ी थाना प्रभारी देवाशीस बोस ने मेयर को दी. इसके बाद मेयर ने मेयर परिषद को छोड़कर अन्य वार्ड पार्षदों को कक्ष से बाहर कर आंदोलनकारियों को आने का बुलावा भेजा. लेकिन तृणमूल कांग्रेस के आंदोलनकारी वार्ड पार्षद सिर्फ मेयर और अधिक से अधिक उपमेयर की उपस्थिति की मांग पर अड़ गये. मेयर को ज्ञापन सौंपने के दौरान अन्य मेयर परिषद सदस्य का कक्ष में उपस्थित रहना विरोधी दल तृणमूल कांग्रेस के शान के खिलाफ था. फिर यह लोग निगम के कमिशनर सोनम वांग्दी भूटिया से शिकायत करने पहुंचे. नांटू पाल ने कमिश्नर से कहा कि समय देने के बाद भी मेयर अपने मेयर परिषद के साथ कक्ष में बैठे हुए हैं.

यह हमारा अपमान है. इस दौरान उन्होंने अशोक भट्टाचार्य के मेयर रहते उनके कक्ष में प्रवेश ना करने का ऐलान किया. कृष्णचंद्र पाल ने कहा कि हम चाहें तो मेयर के इस वर्ताव के लिये उन्हें घर जाने से भी रोक सकते हैं. कमिश्नर से शिकायत कर आंदोलनकारी वापस लौट गये.


इस संबध में नेता नांटू पाल ने कहा कि सिलीगुड़ी वासियों को बुनियादी सुविधा देने में मेयर अशोक भट्टाचार्य पूरी तरह से विफल रहे हैं. सिर्फ सेमिनार के नाम पर जनता का पैसा खर्च किया जा रहा है. जबकि निगम का काम करने वाले ठेकेदारों का काफी रूपया बकाया है. श्री पाल ने मेयर से श्वेत पत्र लाने की मांग करते हुए कहा कि माकपा सरकार से अधिक रूपया तृणमूल राज्य सरकार सिलीगुड़ी नगर निगम को दे रही है. श्री पाल ने बताया कि आज के ज्ञापन सौंपने के लिये निगम के कमिश्नर के मार्फत मेयर से अनुमति मांगी गयी थी. उन्होंने अनुमति देकर आज का सारा खेल रचाया. आज के वर्ताव के लिए श्री पाल ने कहा कि मेयर को माफी मांगनी होगी.
क्या कहते हैं मेयर
सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर अशोक भट्टाचार्य ने भी विरोधियों के सवालों का करारा जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि सिलीगुड़ी की जनता ने मेयर और विधायक के पद पर उन्हें चुना है. 2020 तक मेयर की कुर्सी से इस्तीफे का कोई प्रश्न ही खड़ा नहीं होता. विरोधियों का काम ही है विरोध करना. अशोक भट्टाचार्य ने कहा कि बोलने के लिये टैक्स नहीं देना होता है, शायद इसलिए मंत्री साहब ने माकपा बोर्ड का अगस्त महीना अंतिम बताया है. जबिक माकपा बोर्ड 2020 से पहले कुर्सी छोड़नेवाली नहीं है. ठेकेदारों के बकाया भुगतान के संबध में अशोक भट्टाचार्य ने कहा कि वित्त वर्ष 2014-15 में एसजेडीए और उत्तर बंगाल विकास मंत्रालय के निर्देश पर प्रशासक ने करोड़ो का कार्य किया लेकिन आज तक एसजेडीए और एनबीडीडी ने रूपये का भुगतान नहीं किया. इसके अलावा राज्य सरकार के पास सिलीगुड़ी नगर निगम का करीब 90 करोड़ रूपया बकाया है. इसके बाद भी निगम की माकपा बोर्ड पिछले वित्तीय वर्ष में 106 करोड़ रूपये का भुगतान कर चुकी है. कक्ष में प्रवेश ना करने देने के आरोप पर श्री भट्टाचार्य ने कहा निर्धारित समय के अनुसार मेयर परिषद सदस्य और चाय के साथ उनके इंतजार में बैठे थे. लेकिन वे कक्ष में नहीं आये. विरोधियों को पता होना चाहिए कि मेयर का मतलब मेयर परिषद होता है. मेयर का इस्तीफा मतलब मेयर परिषद का जाना.

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