फुलहार नदी भी खतरे के निशान के ऊपर
ग्रामीणों ने मंत्री के सामने जताया गुस्सा
प्रशासन ने शुरू किया राहत और बचाव कार्य
मालदा. बीते दो-तीन दिनों से कालियाचक-3 ब्लॉक की बिननगर-1 ग्राम पंचायत के सरकारटोला गांव में गंगा अपने कटाव से तबाही मचा रही है. शनिवार को कटावग्रस्त इलाकों के दौरे पर गये उत्तर बंगाल विकास मंत्री रवींद्रनाथ घोष को ग्रामीणों के गुस्से का सामना करना पड़ा. ग्रामीणों ने मंत्री से कहा कि बीते दो सालों से इस इलाके में कटाव हो रहा है.
हम लोगों ने जिला प्रशासन, फरक्का बैराज के अधिकारियों, ब्लॉक प्रशासन सभी से कई बार गुहार लगायी, लेकिन सबकुछ बेनतीजा रहा. जब बाढ़ का पानी चढ़ता है और कटाव शुरू हो जाता है, तब प्रशासन की नींद खुलती है. इस बार भी यही हुआ. बीते कुछ दिनों से सरकारटोला, मुन्नाटोला, चाइनाबाजार गांवों में बड़े पैमाने पर कटाव हो रहा है. जब पानी बढ़ गया है, कटाव हो रहा है, तब फरक्का बैराज के अधिकारियों ने फौरी रोकथाम का काम शुरू किया है. अगर यही काम सूखे मौसम में होता, तो हम लोगों को इस विपत्ति का सामना नहीं करना पड़ता.
इलाके के लोगों ने मंत्री से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की.बाद में मंत्री रवींद्रनाथ घोष ने पत्रकारों से कहा कि इन सब इलाकों में कटाव रोकने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है. प्रशासन ने कई बार इस बारे में फरक्का बैराज के अधिकारियों को बताया था. स्थानीय ग्रामवासी बता रहे हैं कि बैराज का एक नंबर गेट खोले जाने से इस इलाके में बड़ा नुकसान हो रहा है. इस मामले को देखने के लिए मैंने जिला अधिकारी से कहा है.
इधर अतिरिक्त जिला अधिकारी कंचन चौधरी ने बताया कि मालदा जिले के तीन ब्लॉकों कालियाचक-3, रतुआ-1 और हरिश्चंद्रपुर-2 में कटाव और बाढ़ की समस्या है. सबसे खराब हाल कालियाचक-3 ब्लॉक का है. वहां तीन ग्राम पंचायतों में काफी नुकसान हुआ है. 100 परिवारों का घर-बार नदी के गर्त में समा गया है. कटाव पीड़ितों को बिननगर गर्ल्स हाइस्कूल में आश्रय दिया गया है.
जिनका घर-बार नदी में समा गया है, उनके लिए सरकारी जमीन की तलाश की जा रही है. साथ ही गत शुक्रवार से इन लोगों के लिए भोजन और मेडिकल कैंप की व्यवस्था की गयी है. कटाव की रोकथाम के लिए सरकारटोला गांव में फरक्का बैराज पक्ष की ओर से काम शुरू किया गया है. अगर यह काम पहले ही शुरू हो गया होता तो अच्छा होता.
अतिरिक्त जिला अधिकारी ने बताया कि इसी तरह हरिश्चंद्रपुर-2 और रतुआ-1 ब्लॉकों में कुल 31 गांव बाढ़ प्रभावित हैं. ऐसा फुलहार नदी में पानी बढ़ने की वजह से हुआ है. हरिश्चंद्रपुर की तीन ग्राम पंचायतों दौलतनगर, इसलामपुर और भालुका में जलस्तर काफी बढ़ जाने की वजह से लोगों ने बांध के ऊपर आश्रय लिया है. कुल मिलाकर हरिश्चंद्रपुर में 10 हजार परिवार प्रभावित हुए हैं.
वहीं रतुआ-1 ब्लॉक की बिलाईमारी, महानंदटोला, काहाला नामक तीन ग्राम पंचायतों के 12 गांवों के 12 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. वहां लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए 38 नावें भेजी गयी हैं. त्रिपाल, सूखा भोजन और मेडिकल टीम भेजी गयी है. फुलहार नदी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है.
