अपने ही सवालों में घिरे तृणमूल नेता नांटू पाल

नहीं दे पाये मीडिया को जवाब सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी-जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण (एसजेडीए) में करीब 200 करोड़ के कथित घोटाला प्रकरण में गिरफ्तार एसजेडीए के तत्कालीन सीइओ गोदाला किरण कुमार एवं विरोधियों के एक बार फिर तेवर तल्ख होते देख तृणमूल कांग्रेस बेकफूट पर नजर आ रही है. शुक्रवार को सिलीगुड़ी नगर निगम के वाम बोर्ड […]

नहीं दे पाये मीडिया को जवाब
सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी-जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण (एसजेडीए) में करीब 200 करोड़ के कथित घोटाला प्रकरण में गिरफ्तार एसजेडीए के तत्कालीन सीइओ गोदाला किरण कुमार एवं विरोधियों के एक बार फिर तेवर तल्ख होते देख तृणमूल कांग्रेस बेकफूट पर नजर आ रही है.
शुक्रवार को सिलीगुड़ी नगर निगम के वाम बोर्ड के मेयर अशोक भट्टाचार्य ने गोदाला के अलावा भी अन्य मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग की थी. इससे पहले गोदाला के गिरफ्तारी वाले दिन ही इसी मुद्दे पर कांग्रेस ने सिलीगुड़ी कोर्ट में आवाज बुलंद की थी. विरोधियों पर पलटवार करते हुए निगम के विरोधी दल के तृणमूल नेता व एसजेडीए के बोर्ड सदस्य नांटू पाल आज सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में मीडिया के सामने वाम शासन में हुए घोटालों का चिट्ठा खोलने से पहले ही अपने ही सवालों में घिर गये.
श्री पाल ने वाम शासन में करोड़ों रुपये के हेराफेरी करने का आरोप लगाया और सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य के तत्कालीन नगर विकास मंत्री व एसजेडीए के चेयरमैन अशोक भट्टाचार्य के समय महानंदा का संस्कार करने के लिए महानंदा एक्शन प्लान परियोजना के तहत 85 करोड़ रुपये केंद्र सरकार व एसजेडीए से संयुक्त रुप से पास हुआ था. लेकिन काम पूरा भी नहीं हुआ और 42 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया. बाकि रुपये भी कहां गये आज तक किसी को नहीं मालूम. वहीं, सिलीगुड़ी से सटे माटीगाड़ा स्थित चांदमणि चाय बगान की 706 एकड़ जमीन को लेकर भी करोड़ों का घपला हुआ.
उसी दौरान आंदोलनकारी दो श्रमिकों के खून से चांदमणि चाय बगान को सींचा गया और खून से रंगी इस बगान पर उत्तरायण टाउनशिप खड़ा कर दिया गया. साथ ही सिलीगुड़ी के विधान रोड एवं हाशमी चौक से सटी जमीन पार्किग के नाम पर रेलवे से खरीद कर एसजेडीए ने एक प्रमोटर को बेच दिया.
जहां आज मार्केट काम्पलेक्स का निर्माण हो रहा है लेकिन पार्किग की कोई व्यस्था ही नहीं है. श्री पाल से जब मीडिया ने सवाल किया कि आज एसजेडीए बोर्ड पर तृणमूल का ही अधिकार है तो इन सभी मुद्दों पर आजतक मामला दायर क्यों नहीं हुआ और पहले इन मुद्दों को क्यूं नहीं उठाया गया. मीडिया के सवालों पर श्री पाल लड़खड़ाते नजर आये और सटीक जवाब नहीं दे सकें.
केवल इतना ही कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर एसजेडीए के चेयरमेन का दायित्व जैसे ही उत्तर बंगाल विकास मंत्री ने संभाला उन्होंने कई बार मीडिया में इन मुद्दों को उछाला था और उनके निर्देश पर एसजेडीए ने मामला भी दायर किया है. कब, किसने और किसके विरुद्ध एफआइआर दर्ज करायी गयी, इसका सही जवाब श्री पाल नहीं दे सके.

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