करीब 7 वर्ष तक दर-दर भटकने के बाद भी उन्हें अपने इस काम में सफलता नहीं मिली है. आखिरकार उन्होंने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक चिट्ठी लिखकर मदद की गुहार लगाई है. एक विशेष बातचीत के दौरान श्री साह ने बताया कि वर्ष 2008 में तत्कालीन सांसद दावा नबरूला के पहल पर केन्द्र सरकार ने सिलीगुड़ी माइक्रो आर्ट म्यूजियम बनाने की अपनी मंजूरी दी थी. केन्द्र सरकार से यह मंजूरी मिलने के बाद उन्होंने दाजिर्लिंग के तत्कालीन डीएम से 10 कट्ठा जमीन उपलब्ध कराने की मांग की.
उनकी इस मांग पर कार्रवाई करते हुए जिला प्रशासन ने बीएलआरओ शिवमंदिर को एक पत्र लिखकर उपयुक्त जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. श्री साह ने बताया कि शुरू में बीएलआरओ ने उन्हें कुछ प्लॉट भी दिखाये थे. उसके बाद ही भूमि तथा भूराजस्व विभाग द्वारा इस मामले में टाल-मटोल शुरू कर दी गई. तब से लेकर अब तक कई बीएलआरओ के दरवाजे का चक्कर वह काट चुके हैं, लेकिन उन्हें जमीन नहीं उपलब्ध करायी गई. माइक्रो आर्ट म्यूजियम नहीं बनने की वजह से उनकी बनाई हुई करीब 2000 से भी अधिक कलाकृति नष्ट होने के कगार पर है.
इसी बात को ध्यान में रखते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक चिट्ठी लिखकर इस मामले में मदद की मांग की है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लिखी चिट्ठी में श्री साह ने अपने द्वारा बनायी गई कलाकृतियों की भी जानकारी दी है. उन्होंने कहा है कि चावल के एक दाने पर उन्होंने 115 भारत के नक्शे बनाये हैं. इसके साथ ही चावल के दाने पर उन्होंने राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय संगीत वंदे मातरम आदि जैसे गाने लिखे हैं. चावल के दाने, सरसो के दाने आदि सूक्ष्म बीज पर कलाकृति बनाना उनका मुख्य शौक है. इस तरह के करीब 2000 से भी अधिक कलाकृति उन्होंने बनाई है और सभी कलाकृति उनके घर पर है. अब उन्हें इसको रखने में भी परेशानी हो रही है. अगर शीघ्र ही म्यूजियम की व्यवस्था नहीं की तो उनकी इन कलाकृतियों के नष्ट हो जाने का खतरा है.
