स्थिति यह है कि दोनों ही गुटों की ओर से कार्यकारी कमेटी का गठन किया गया है और अध्यक्ष तथा महासचिव जैसे पद बांटे गये हैं. सिलीगुड़ी में शिव सेना के अध्यक्ष डॉ ब्रज गोपाल हलदर हैं. अब तक लोग उन्हीं को शिव सेना उत्तर बंगाल राज्य कमेटी के अध्यक्ष मानते रहे हैं. पिछले कुछ महीनों से मिठुन नाग नामक एक व्यक्ति अपने आप को शिव सेना उत्तर बंगाल राज्य कमेटी का अध्यक्ष बता रहा है. बस लड़ाई यहीं से शुरू हो गई है. डॉ ब्रज गोपाल हलदर का कहना है कि शिव सेना के असली अध्यक्ष वहीं हैं. उन्होंने मिठुन नाग पर फर्जी होने का आरोप लगाया है और कहा है कि मिठुन नाग शिव सेना के नाम पर अवैध वसूली का काम करता है. मिठुन के पास शिव सेना की प्राथमिक सदस्यता तक नहीं है. उन्होंने मिठुन नाग द्वारा गठित कार्यकारिणी को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि शिव सेना की रसीद छपवा कर मिठुन नाग पैसे की वसूली कर रहा है. वास्तविक में शिव सेना में रसीद छपवा कर पैसे की लेन-देन का कोई प्रावधान नहीं है.
शिव सेना की ओर से 10 तथा 20 रुपये के कूपन छपवाये जाते हैं. इन कूपनों के माध्यम से ही चंदा संग्रह होता है. यह कूपन पहले से ही पिंट्र किये होते हैं. इसमें 10 या 20 रुपये का उल्लेख भी किया होता है. शिव सेना के कूपन में शिव सेना के चुनाव चिह्न् के साथ बाल ठाकरे की तस्वीर लगी होती है. दूसरी तरफ मिठुन नाग ने जो रसीद छपवायी है, उसमें रुपये के स्थान को खाली रखा गया है. वह अपनी मर्जी से रसीद में रुपये लिखकर उसकी वसूली करता है. उन्होंने आगे कहा कि मिठुन नाग के इस अवैध कार्यकलाप के खिलाफ उन्होंने 7/7/2014 को भक्ति नगर थाने में शिकायत भी दर्ज करायी थी, लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. पुलिस ने जीडी नंबर 361 के तहत शिकायत दर्ज कर ली है, लेकिन उसके बाद से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की. उन्होंने यथाशीघ्र ही मिठुन नाग के गिरफ्तारी की मांग की है. उन्होंने कहा है कि अपनी इस मांग को लेकर वह शीघ्र ही पुलिस अधिकारियों से मिलेंगे और उन्हें एक ज्ञापन भी देंगे. डॉ हलदर ने आगे कहा कि मिठुन नाग के फर्जी शिव सेना होने की जानकारी उन्होंने प्रशासन को भी दी है. उसके बाद भी वह उत्तर बंगाल के विभिन्न जिलों में अपने आप को शिव सेना का नेता बताकर ठगी का काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर उत्तर बंगाल के सभी सात जिलों के जिला अधिकारी को एक ज्ञापन भी देंगे.
