बंद बागान खुलने के आसार नहीं, सीतारमन के दौरे से लाभ नहीं

सिलीगुड़ी: केन्द्रीय वाणिज्य राज्यमंत्री निर्मला सीतारमन के बहुप्रतीक्षित उत्तर बंगाल दौरे का चाय श्रमिकों को कोई विशेष लाभ नहीं हुआ है. चाय उद्योग से जुड़े लोग तथा चाय बागान के श्रमिक काफी लंबे समय से सीतारमन के उत्तर बंगाल दौरे का इंतजार कर रहे थे. केन्द्रीय वाणिज्य राज्यमंत्री निर्मला सीतारमन दो दिवसीय दौरे पर सिलीगुड़ी […]

सिलीगुड़ी: केन्द्रीय वाणिज्य राज्यमंत्री निर्मला सीतारमन के बहुप्रतीक्षित उत्तर बंगाल दौरे का चाय श्रमिकों को कोई विशेष लाभ नहीं हुआ है. चाय उद्योग से जुड़े लोग तथा चाय बागान के श्रमिक काफी लंबे समय से सीतारमन के उत्तर बंगाल दौरे का इंतजार कर रहे थे. केन्द्रीय वाणिज्य राज्यमंत्री निर्मला सीतारमन दो दिवसीय दौरे पर सिलीगुड़ी आयीं और उन्होंने सिलीगुड़ी, तराई तथा डुवार्स के विभिन्न चाय बागानों का दौरा किया.

खासकर वर्षो से बंद रेडबैक तथा सुरेन्द्रनाथ चाय बागान पर उनकी खास नजर थी. केन्द्रीय मंत्री के इस दौरे के बाद चाय श्रमिकों को ऐसा लग रहा था कि निर्मला सीतारमन शीघ्र ही बंद चाय बागानों को खुलवाने का कोई विशेष व्यवस्था करेंगी. 17 तारीख को चाय उद्योग पर सिलीगुड़ी में हुई उनकी बैठक पर सभी चाय बागानों के श्रमिकों की निगाहें लगी हुई थी. बैठक के बाद जो परिणाम सामने आया, उससे चाय श्रमिक भारी निराश और हताश हैं.

केन्द्रीय वाणिज्य राज्य मंत्री ने चाय उद्योग के लिए 1425 करोड़ रुपये के परियोजनाओं की तो घोषणा की, लेकिन बंद चाय बागानों को खुलवाने तथा चाय श्रमिकों के कल्याण के लिए किसी भी प्रकार की योजनाओं का ऐलान नहीं किया. उन्होंने इस पूरे मामले में राज्य सरकार पर जिम्मेदारी थोपते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया है. उनके इस कदम की चाय श्रमिक तथा विभिन्न श्रमिक यूनियनों ने निंदा की है. पश्चिम बंगाल चा बागान श्रमिक कर्मचारी यूनियन के तराई-डुवार्स रिजन के सहायक सचिव अमूल्य दास ने केन्द्रीय वाणिज्य राज्यमंत्री के दौरे पर कहा कि चाय श्रमिकों को इसका कोई लाभ नहीं हुआ है. उन्होंने चाय बागान मालिकों को खुश करने की कोशिश की है. निर्मला सीतारमन ने चाय बागान में कार्यरत गरीब चाय श्रमिकों की हित की अनदेखी की है. माकपा-माले नॉर्थ बंगाल रिजनल कमेटी के सचिव इन्द्रनील भट्टाचार्य ने भी कहा है कि केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमन के वर्तमान दौरे से चाय श्रमिकों को कोई लाभ नहीं हुआ है.

उन्होंने चाय श्रमिकों के उम्मीदों के साथ धोखाधड़ी की है. डुवार्स तथा तराई के बंद चाय बागानों के श्रमिकों की एक ही इच्छा है कि जल्दी से चाय बागान खुले और वह अपनी सामान्य जिंदगी जी सकें. सीतारमन ने जिन चाय बागानों का दौरा किया था वहां के श्रमिकों ने भी उन्हें अपनी व्यथा बतायी थी और बंद बागानों को शीघ्र खोलने की मांग की थी. यह बेहद दुर्भाग्यजनक है कि चाय बागान से निकलते ही मंत्री अपना वादा भूल गईं. उन्होंने आगे कहा कि सीतारमन ने 1425 करोड़ रुपये के योजनाओं का ऐलान किया, लेकिन चाय श्रमिकों के कल्याण के लिए एक रुपये की भी घोषणा नहीं की.

श्री भट्टाचार्य ने आगे कहा कि चाय श्रमिकों की मुख्य मांग न्यूनतम वेतन मजदूरी तय करना है. न्यूनतम मजदूरी तय करने को लेकर काफी दिनों से वह लोग आंदोलन कर रहे हैं. कुछ महीने पहले राज्य सरकार के साथ त्रिपक्षीय बैठक के बाद न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है. उसके बाद से अब तक न्यूनतम मजदूरी तय करने की दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है. उन्होंने आगे कहा कि केन्द्र सरकार राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहरा कर इस मुद्दे से भाग नहीं सकती. चाय श्रमिकों को राज्य अथवा केन्द्र सरकार के अधिकार क्षेत्र को लेकर कोई लेना-देना नहीं है. श्रमिकों की मुख्य मांग न्यूनतम मजदूरी तय करने और बंद चाय बागानों को खोलने की रही है. राज्य और केन्द्र सरकार को मिलकर इस दिशा में पहल करनी चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि इस बदले परिपेक्ष में चाय बागान ट्रेड यूनियनों के संयुक्त संगठन ज्वाइंट फोरम की शीघ्र ही एक बैठक होगी. इस बैठक में केन्द्रीय मंत्री के चाय बागान दौरे पर विचार-विमर्श किया जायेगा. इसके साथ ही न्यूनतम मजदूरी तय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जायेगा.

क्या कहा था सीतारमन ने
केन्द्रीय वाणिज्य राज्य मंत्री निर्मला सीतारमन ने कहा था कि चाय श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी तय करना तथा बंद बागानों को यथाशीघ्र खुलवाना केन्द्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है. उन्होंने चाय श्रमिकों की इतनी कम मजदूरी होने तथा चाय श्रमिकों की स्थिति काफी दयनीय होने को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी और इसके लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया था. उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार ने चाय श्रमिकों की भूख से मरने की नहीं मानी है और न ही इस संबंध में केन्द्र सरकार से किसी प्रकार की सहायता की मांग की गई है.
क्या है स्थिति
उत्तर बंगाल के विभिन्न चाय बागानों में काम कर रहे चाय श्रमिकों की स्थिति अत्यंत ही दयनीय है. खासकर बंद चाय बागानों के श्रमिक तो भूखमरी एवं इलाज की कमी के शिकार हैं. हाल ही में डुवार्स के नागेश्वरी चाय बागान में तीन चाय श्रमिकों की मौत भूख की वजह से हो गई है. हालांकि राज्य सरकार ऐसा मानने के लिए तैयार नहीं है. चाय श्रमिकों की वर्तमान दैनिक मजदूरी 112 रुपये प्रतिदिन है और अगले तीन वर्षो में प्रति वर्ष 10 रुपये बढ़ाने का प्रस्ताव है. न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए मिनी सचिवालय उत्तरकन्या में एक त्रिपक्षीय बैठक हुई थी और उसमें एक कमेटी का गठन किया गया था. उसके बाद से लेकर अब तक चाय श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी तय करने की दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है.

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