श्रम विरोधी कानून के विरुद्ध श्रमिक एकजुट निकाली रैली, तोड़ा कानून

सिलीगुड़ी. केंद्र व राज्य सरकार के श्रम विरोधी कानून के विरुद्ध आज राज्य ही नहीं बल्कि देशभर के श्रमिक एकजुट हुए. सीटू ट्रेड यूनियन समेत वाम मोरचा के सभी घटक दलों के ट्रेड यूनियनों के संयुक्त बैनर तले सरकार के खिलाफ प्रतिवाद रैली निकाली गयी. कानून तोड़कर गिरफ्तारी दी गयी और जोरदार तरीके से विरोध […]

सिलीगुड़ी. केंद्र व राज्य सरकार के श्रम विरोधी कानून के विरुद्ध आज राज्य ही नहीं बल्कि देशभर के श्रमिक एकजुट हुए. सीटू ट्रेड यूनियन समेत वाम मोरचा के सभी घटक दलों के ट्रेड यूनियनों के संयुक्त बैनर तले सरकार के खिलाफ प्रतिवाद रैली निकाली गयी. कानून तोड़कर गिरफ्तारी दी गयी और जोरदार तरीके से विरोध प्रदर्शन किया गया.

सिलीगुड़ी में भी ट्रेड यूनियनों ने कानून तोड़ा और प्रदर्शनकारी श्रमिकों के नेता व सीटू के जिला महासचिव समन पाठक उर्फ सूरज, अजीत सरकार, दिलीप दास समेत सैकड़ों श्रमिकों ने गिरफ्तारी दी. लेकिन प्रदर्शनकारी श्रमिकों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि पुलिस के पास वाहन कम पड़ गये और थाना का लॉकअप भी छोटा पड़ता देख सभी को मौके पर ही छोड़ दिया गया. गिरफ्तारी से पहले हिलकार्ट से संयुक्त ट्रेड यूनियन के बैनर तले विशाल प्रतिवाद रैली निकाली गयी. रैली एसडीओ दफ्तर तक न पहुंचे इसके लिए सिलीगुड़ी कमिश्नरेट की पुलिस ने पहले से ही दो कड़े सुरक्षा घेरों का इंतजाम किया था.

पहले घेरे के तहत सिलीगुड़ी कोर्ट के मुख्य द्वार के सामने पुलिस भारी तादाद में मुश्तैद थी. दूसरे घेरे के तहत पुलिस ने मुख्य द्वार को ही बंद कर दिया और लोहे के बेरिकेट भी लगा दिये. सुरक्षा की कमान एसीपी पिनाकी मजूमदार व सिलीगुड़ी थाना के इंस्पेक्टर अचिंत दास ने खुद संभाल रखी थी. रैली जैसे ही कोर्ट के सामने पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकना चाहा. इस दौरान पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर खींचातानी हुई.

अंतत: प्रदर्शनकारियों को कोर्ट के बाहर ही रोकने में पुलिस कामयाब रही और पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर मौके पर ही छोड़ दिया. वहीं, समन पाठक ने आज के प्रदर्शन को कामयाब व श्रमिकों की जीत करार दिया. उन्होंने कहा कि राज्य की तृणमूल सरकार के साथ-साथ केंद्र की भाजपा सरकार भी इन दिनों श्रम विरोधी कानून लागू करने के प्रयास में है. पहले से लागू श्रम कानून को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश की जा रही है. भूमि अधिग्रहण बिल के सहारे किसानों के साथ-साथ श्रमिकों का भी अधिकार छीनने की कोशिश की जा रही है. लेकिन हम श्रमिक व किसानों के साथ खड़े हैं और उनके हक के लिए हर लड़ाई लड़ते रहेंगे.

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