सिलीगुड़ी नगर निगम: कृष्ण चंद्र के नाम पर विवाद, बोर्ड गठन में फिर फंसा पेंच

सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी नगर निगम में वाम मोरचा द्वारा बोर्ड गठन किये जाने को लेकर एक बार फिर से पेंच फंसता हुआ नजर आ रहा है. राज्य सरकार ने बोर्ड गठन हेतु अधिसूचना जारी कर दी है और 18 मई को सिलीगुड़ी नगर निगम के नवनिर्वाचित पार्षदों का शपथ ग्रहण समारोह होना है. सिलीगुड़ी नगर निगम […]

सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी नगर निगम में वाम मोरचा द्वारा बोर्ड गठन किये जाने को लेकर एक बार फिर से पेंच फंसता हुआ नजर आ रहा है. राज्य सरकार ने बोर्ड गठन हेतु अधिसूचना जारी कर दी है और 18 मई को सिलीगुड़ी नगर निगम के नवनिर्वाचित पार्षदों का शपथ ग्रहण समारोह होना है.

सिलीगुड़ी नगर निगम के कमिश्नर सोनम वांग्दी भुटिया द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 18 तारीख को ही मेयर के साथ-साथ चेयरमैन को भी शपथ दिलाने का कार्यक्रम है. वाम मोरचा ने पहले से ही 42 नंबर वार्ड के माकपा पार्षद दिलीप सिंह को चेयरमैन पद का उम्मीदवार घोषित कर रखा है. यदि विरोधी दल द्वारा चेयरमैन पद हेतु चुनाव लड़ने के लिए कोई नामांकन पत्र दाखिल नहीं होता है तो दिलीप सिंह का चेयरमैन बनना तय है.

यहां उल्लेखनीय है कि हाल में संपन्न सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव में 47 सीटों में से 23 सीटों पर वाम मोरचा ने जीत हासिल की है और वार्ड नंबर 15 के निर्दलीय पार्षद अरविंद घोष उर्फ अमू दा के समर्थन से बोर्ड बनाने की तैयारी कर ली है. यहां तक तो सबकुछ ठीक था, लेकिन 18 तारीख को पार्षदों की पहली बैठक का अध्यक्ष तृणमूल कांग्रेस के नेता कृष्ण चन्द्र पाल को बनाने को लेकर विवाद हो गया है. कृष्ण चन्द्र पाल वार्ड नंबर 23 से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने में सफल रहे हैं. वाम मोरचा को कृष्ण चन्द्र पाल के नाम पर आपत्ति है. राज्य सरकार ने बोर्ड गठन हेतु जो अधिसूचना जारी की है, उसमें साफ तौर पर उल्लेख है कि कृष्ण चन्द्र पाल पार्षदों की पहली बैठक की अध्यक्षता करेंगे. वाम मोरचा ने कृष्ण चन्द्र पाल के निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाया है. वाम मोरचा के नेताओं का कहना है कि मात्र 17 सीटें मिलने के बाद भी तृणमूल कांग्रेस ने अपनी ओर से बोर्ड गठन की कोशिश की थी. ऐसे में कृष्ण चन्द्र पाल किस प्रकार से निष्पक्ष रूप से बैठक की अध्यक्षता कर सकते हैं. वाम मोरचा ने कुछ दिनों पहले ही वार्ड नंबर 46 के माकपा पार्षद मुकुल सेनगुप्ता के नाम का प्रस्ताव पहली बैठक की अध्यक्षता के लिए किया था. कई वाम पार्षद सिलीगुड़ी नगर निगम कमिश्नर सोनम वांग्दी भुटिया से मिले और पार्षदों की पहली बैठक की अध्यक्षता करने के लिए मुकुल सेनगुप्ता के नाम का प्रस्ताव दिया था. नियम एवं परंपरा के अनुसार, बोर्ड गठन करने वाली पार्टी के वरिष्ठ पार्षद बैठक की अध्यक्षता करते हैं. मुकुल सेनगुप्ता कई बार पार्षद चुने गये हैं.

राज्य सरकार ने वाम मोरचा के इस मांग की अनसुनी करते हुए तृणमूल कांग्रेस के नेता कृष्ण चन्द्र पाल को बैठक की अध्यक्षता करने का अधिकार दिया है. इस संबंध में वाम मोरचा के मेयर पद के उम्मीदवार तथा पूर्व मंत्री माकपा नेता अशोक भट्टाचार्य का कहना है कि राज्य सरकार ने नियमों एवं परंपराओं की अनदेखी की है. आम तौर पर जिस पार्टी के पार्षदों की संख्या ज्यादा होती है, बैठक की अध्यक्षता उसी पार्टी के वरिष्ठ सदस्य करते हैं. पहली बार कम सीट जीतने के बाद भी विरोधी पार्टी के पार्षद को बैठक का अध्यक्ष बना दिया गया है. दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि ऐसी कोई परंपरा अथवा नियम नहीं है. पहली बैठक के लिए किसी भी पार्टी के वरिष्ठ पार्षद को अध्यक्ष बनाया जा सकता है. राज्य सरकार ने इसी का पालन करते हुए कृष्ण चन्द्र पाल को अध्यक्ष बनाया है.

इस बीच, माकपा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मेयर पद के लिए अशोक भट्टाचार्य तथा चेयरमैन पद के लिए दिलीप सिंह शीघ्र ही अपना नामांकन दाखिल करेंगे. इधर, सिलीगुड़ी नगर निगम के कमिश्नर सोनम वांग्दी भुटिया ने बताया है कि 18 तारीख को सभी निर्वाचित पार्षदों को शपथ ग्रहण कराया जायेगा. इसके लिए सभी पार्षदों को आज चिट्ठी भेज दी गई है. दाजिर्लिंग के जिला अधिकारी नवनिर्वाचित पार्षदों को शपथ ग्रहण करायेंगे. यहां उल्लेखनीय है कि हाल में संपन्न नगर निगम चुनाव में वाम मोरचा ने 23, तृणमूल ने 17, कांग्रेस ने 4, भाजपा ने 2 तथा एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती है. नगर निगम बोर्ड गठन करने के लिए 24 सीटों की आवश्यकता है. 47 सदस्यों वाली नगर निगम में वाम मोरचा ने एक निर्दलीय पार्षद के समर्थन से बोर्ड गठन का दावा किया है.

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