सिलीगुड़ी: सिलीगुडी जिला अस्पताल में पहले से ही डॉक्टरों की भारी कमी है. ऊपर से जो डॉक्टर हैं भी वह नियमित रूप से अस्पताल नहीं आते. इसकी वजह से एक ओर जहां रोगियों की चिकित्सा प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर अन्य डॉक्टरों पर काम का बोझ बढ़ रहा है, जिसकी वजह से ऐसे डॉक्टरों में भारी रोष है. ताजा मामला सिलीगुड़ी सदर अस्पताल के मेडिसीन विभाग का है. मेडिसीन विभाग में तैनात चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर सॉम्यो घोष पिछले पांच माह से अस्पताल नहीं आ रहे हैं.
बताया जा रहा है कि उनके एक हाथ में फ्रैक्चर हो जाने के कारण वह ‘अनफिट’ हैं और सरकार द्वारा निर्धारित मेडिकल बोर्ड ने उन्हें लंबी छुट्टी दे दी है. विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, डॉ घोष पिछले 9 नवंबर से अस्पताल नहीं आ रहे हैं.
उनके एक हाथ में फ्रैक्चर हो जाने के कारण उन्होंने छुट्टी ले रखी थी. बाद में 12 फरवरी को दाजिर्लिंग में मेडिकल बोर्ड ने उनकी छुट्टी को और तीन महीने के लिए बढ़ा दिया. यहां उल्लेखनीय है कि डॉ सॉम्यो घोष दाजिर्लिंग जिला अस्पताल में ही तैनात हैं, लेकिन उन्हें डेपुटेशन पर सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में काम करने के लिए भेजा गया है. इसलिए उनकी छुट्टी बढ़ाने या छुट्टी रद्द करने पर कोई भी फैसला दाजिर्लिंग सदर अस्पताल में ही होता है. सिलीगुड़ी मेडिसीन विभाग में डॉ सॉम्यो घोष को लेकर चार डॉक्टर हैं. पिछले कुछ महीने से उनके छुट्टी में होने के कारण डॉ सिरसेंदु पाल, डॉ ओपू अधिकारी तथा डॉ सिद्धार्थ विश्वास मेडिसीन विभाग का काम-काज संभाल रहे हैं. अस्पताल सूत्रों ने बताया है कि गरमी के मौसम में एक डॉक्टर की कमी के कारण मेडिसीन विभाग में रोगियों की चिकित्सा प्रभावित हो रही है.
माना यह जाता है कि गरमी के मौसम में बीमारियां अधिक होती हैं. यही वजह है कि सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के मेडिसीन विभाग में हर दिन ही रोगियों की लंबी कतारें लगी रहती हैं. तीन डॉक्टर ही इन रोगियों की चिकित्सा कर रहे हैं. रोगियों की लगातार बढ़ती संख्या एवं एक डॉक्टर के अस्पताल नहीं आने की वजह से इन तीनों डॉक्टरों में भी भारी रोष है. हालांकि यह तीनों ही इस मामले को लेकर कुछ बोलना नहीं चाहते हैं. इस बीच, आरोप ये है कि अस्पताल से छुट्टी पर चल रहे डॉ सॉम्यो घोष विभिन्न नर्सिग होमों में काम कर रहे हैं. इसके अलावा वह अपने निजी चेम्बर में भी नियमित रूप से रोगियों की चिकित्सा कर रहे हैं. सबसे आश्चर्यजनक बात ये है कि डॉ घोष राज्य सरकार से भी नियमित रूप से वेतन ले रहे हैं. इस तरह से वह दोहरी कमाई कर रहे हैं. छुट्टी की अवधि के दौरान डॉ घोष रोगियों की चिकित्सा कर रहे हैं, यह पूरी तरह से साबित हो चुका है. 7 मार्च, 2015 को डॉ घोष द्वारा एक रोगी की चिकित्सा संबंधी पिस्क्रिप्शन से यह साबित हो गया है कि वह भले ही सरकारी अस्पताल से छुट्टी पर हों, लेकिन निजी छुट्टी पर नहीं हैं. सिलीगुड़ी के कई नर्सिग होमों में चिकित्सा करने के साथ-साथ वह कई दवा दुकानों में भी चेम्बर बनाये हुए हैं. दिन के 2 बजे से लेकर देर रात तक वह विभिन्न स्थानों पर रोगियों की चिकित्सा कर रहे हैं.
क्या कहते हैं स्वास्थ्य कार्यकर्ता
सिलीगुड़ी के प्रमुख स्वास्थ्यकर्ता तथा समाजसेवी सोमनाथ चटर्जी का कहना है कि यह केवल डॉ सॉम्यो घोष का मामला नहीं है. सिलीगुड़ी जिला अस्पताल सहित उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल तथा विभिन्न सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर अस्पताल न आकर निजी प्रैक्टिस में लगे रहते हैं. सरकारी डॉक्टरों के इस तरह की मानसिकता में लगातार वृद्धि हो रही है. ऐसे डॉक्टरों को सरकारी पद से इस्तीफा देकर ही निजी प्रैक्टिस करनी चाहिए. चटर्जी ने आगे कहा कि इस तरह के मामले की जानकारी कई बार सरकार को दी गयी है. उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज में इसी तरह का मामला सामने आने के बाद उत्तर बंगाल विकास मंत्री गौतम देव ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन क्या कार्रवाई हुई, इसका किसी को कुछ भी पता नहीं है.
क्या कहते हैं डॉ घोष
इस संबंध में डॉ सॉम्यो घोष का कहना है कि उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन सरकार ने अभी तक इस्तीफा मंजूर नहीं किया है. इसके अलावा उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले महीने से सरकार ने उन्हें तनख्वाह नहीं दी है. उन्होंने कहा कि उनका हाथ टूटा हुआ है और वह अस्पताल में इतने अधिक रोगियों की चिकित्सा नहीं कर सकते. सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में रोगियों का भारी दबाव होता है. निजी प्रैक्टिस किये जाने के संबंध में उन्होंने कहा कि नर्सिग होम में रोगियों की संख्या कम होती है और वहां डॉक्टरों की सहायता के लिए दूसरे कर्मचारी भी उपस्थित होते हैं. नर्सिग होम तथा निजी चेम्बर में रोगियों की उतनी भीड़ भी नहीं होती. इसी वजह से वह नर्सिग होम तथा निजी चेम्बर में चिकित्सा का काम कर रहे हैं.वह नन प्रैक्टिसिंग एलाउंस भी नहीं लेते हैं.
