स्नातक पार्ट-1: परीक्षा नहीं दे सकेंगे 300 विद्यार्थी

मालदा: क्लास में न्यूनतम उपस्थित नहीं होने के कारण तृणमूल छात्र परिषद के 100 सदस्यों सहित कुल 300 छात्र-छात्राओं को स्नातक पार्ट-1 के टेस्ट परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मालदा कॉलेज प्रबंधन ने नहीं दी है. इन लोगों को परीक्षा कक्ष से बाहर कर दिया गया. हालांकि तृणमूल छात्र परिषद ने इन छात्र-छात्राओं का […]

मालदा: क्लास में न्यूनतम उपस्थित नहीं होने के कारण तृणमूल छात्र परिषद के 100 सदस्यों सहित कुल 300 छात्र-छात्राओं को स्नातक पार्ट-1 के टेस्ट परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मालदा कॉलेज प्रबंधन ने नहीं दी है. इन लोगों को परीक्षा कक्ष से बाहर कर दिया गया. हालांकि तृणमूल छात्र परिषद ने इन छात्र-छात्राओं का समर्थन नहीं कर कॉलेज प्रबंधन का समर्थन किया है. मालदा कॉलेज सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 4 मार्च से बीए, बीएससी एवं बी-कॉम पार्ट-1 के टेस्ट परीक्षा की शुरूआत हुई है. 23 मार्च तक परीक्षा जारी रहेगी.
इस परीक्षा में कुल 22 सौ छात्र-छात्राओं के शामिल होने की बात थी. परीक्षा शुरू होने से पहले जब छात्र-छात्राओं की उपस्थिति का आंकड़ा सामने आया, तो पता चला कि यूनिवर्सिटी ग्रान्ट कमीशन के नियमों के अनुसार काफी छात्र-छात्राओं की उपस्थित 75 प्रतिशत नहीं थी. इस नियम को यदि लागू रखा गया होता, तो अधिकांश छात्र-छात्रएं परीक्षा नहीं दे पाते. बाद में एक बैठक हुई, जिसमें 40 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराने वाले छात्र-छात्राओं को टेस्ट परीक्षा में बैठने देने की अनुमति देने का निर्णय लिया गया. उसके बाद ही 300 विद्यार्थी ऐसे निकले, जिनकी उपस्थिति 40 प्रतिशत भी नहीं थी.

उसके बाद ही इन लोगों को परीक्षा में शामिल नहीं होने देने का निर्णय लिया गया. 4 मार्च को यह लोग जब परीक्षा देने आये, तभी इन लोगों को बाहर का दरवाजा दिखा दिया गया. इसमें तृणमूल छात्र परिषद संचालित छात्र संसद के दो सदस्य स्वर्णदीप दासगुप्ता, तथा अबु ताहिल भी शामिल हैं. इसके अलावा तृणमूल छात्र परिषद से जुड़े 100 अन्य विद्यार्थी भी परीक्षा नहीं दे पा रहे हैं. मालदा कॉलेज के अध्यक्ष असीम सरकार ने बताया है कि वर्ष 2014 के जुलाई महीने से शुरू शिक्षा सत्र के दौरान ही विद्यार्थियों को इस बात की जानकारी दे दी गई थी कि यदि वह अपनी कक्षा में 75 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज नहीं कराते हैं, तो उन्हें परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी जायेगी. चूंकि अधिकांश विद्यार्थी ही 75 प्रतिशत उपस्थित दर्ज कराने में असफल रहे हैं, इसलिए 40 प्रतिशत तक उपस्थिति दर्ज कराने वाले विद्यार्थियों को टेस्ट परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई है. उन्होंने कॉलेज प्रबंधन के इस निर्णय पर छात्र संसद के विरोध नहीं किये जाने के फैसले का भी स्वागत किया है. दूसरी ओर कॉलेज छात्र संसद के सचिव अबु तलेहा ने बताया है कि हमलोगों के साथ बातचीत करने के बाद ही कॉलेज प्रबंधन ने यह निर्णय लिया है. यह पूरी तरह से कानून सम्मत है और इसके विरोध का कोई मतलब नहीं है. इसके साथ ही मालदा कॉलेज प्रबंधन समिति के अध्यक्ष कृष्णोन्दु चौधरी भी इस निर्णय को लेकर कॉलेज प्रबंधन के साथ हैं. उन्होंने बताया कि हाल ही में नेशनल एसेसमेंट ऐंड एक्रीडिटेशन काउंसिल (नैक) के सदस्य कॉलेज का दौरा करके गये हैं. उन्होंने कॉलेज की प्रशंसा की थी, लेकिन साथ ही उन्होंने कहा था कि छात्र-छात्राओं की उपस्थिति बढ़ाने की आवश्यकता है. इसीलिए कॉलेज प्रबंधन ने यह निर्णय लिया है.

विद्यार्थियों में हताशा
दूसरी तरफ टेस्ट परीक्षा में शामिल नहीं हो पाने के कारण विद्यार्थियों में भारी हताशा है. इन लोगों ने कहा है कि कॉलेज में नियमित रूप से क्लास नहीं होती है. कई बार कॉलेज में आकर भी वापस लौट जाना पड़ता है. इसी वजह से वे लोग क्लास में अधिक समय तक उपस्थित नहीं सके हैं. इसके अलावा छात्र संगठन के काम में भी व्यस्त रहने के कारण क्लास में उपस्थित रह पाना संभव नहीं हो पाता. इन लोगों ने तृणमूल छात्र परिषद की भी कड़ी आलोचना की. इन लोगों का कहना था कि वे साल भर तक तृणमूल छात्र परिषद के लिए काम करते रहे और अब मौका मिलने पर उन लोगों ने कोई मदद नहीं की. इन लोगों ने कहा कि वे लोग एक बार फिर से इस मामले में नरमी बरतने का आग्रह कॉलेज प्रबंधन से करेंगे.
क्या कहना है जिला अध्यक्ष का
तृणमूल छात्र परिषद के जिला अध्यक्ष प्रसेनजीत दास ने कहा है कि हमारे दो छात्र संसद प्रतिनिधि सहित 100 विद्यार्थी कम उपस्थिति के कारण परीक्षा नहीं दे पा रहे हैं. इन लोगों ने इस मामले में उनसे बातचीत कर परीक्षा में बैठने की व्यवस्था करने की बात कही थी. उन्होंने कहा कि हम लोग अन्यायपूर्ण माांगों का समर्थन नहीं करते हैं, इसलिए हम उनके गलत मांगों का समर्थन नहीं करेंगे.

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