सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव: विभिन्न दलों के हैवीवेट उतरेंगे मैदान में

सिलीगुड़ी: दो दिनों तक होली का रंग छाने के बाद अब सिलीगुड़ी में चुनावी रंग छाने लगा है. सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव की तैयारियां जोर-शोर से जारी है. प्रशासनिक स्तर पर भले ही अभी कोई खास तैयारी नहीं की जा रही हो, लेकिन विभिन्न राजनीतिक दल अपनी तरफ से जोर-शोर से तैयारियों में जुटे हुए […]

सिलीगुड़ी: दो दिनों तक होली का रंग छाने के बाद अब सिलीगुड़ी में चुनावी रंग छाने लगा है. सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव की तैयारियां जोर-शोर से जारी है. प्रशासनिक स्तर पर भले ही अभी कोई खास तैयारी नहीं की जा रही हो, लेकिन विभिन्न राजनीतिक दल अपनी तरफ से जोर-शोर से तैयारियों में जुटे हुए हैं.

होली के अवसर पर दो दिन की छुट्टी थी और विभिन्न दलों के नेता होली के बहाने मतदाताओं से संपर्क करने में जुटे हुए थे. दो दिनों तक हालांकि दीवार लेखन का काम बंद था. आज शनिवार से विभिन्न वार्डो में एक बार फिर से दीवार लेखन का काम शुरू हो गया है.

पहले तृणमूल ने दीवार लेखन का काम शुरू किया था और अब वाम मोरचा की ओर से भी विभिन्न वार्डे में दीवार लेखन के साथ ही विभिन्न दीवारों को दखल करने का काम शुरू कर दिया गया है. वार्ड नंबर 3 के विभिन्न इलाकों में तृणमूल के साथ-साथ वाम मोरचा के घटक दल आरएसपी द्वारा दीवार लेखन का काम शुरू कर दिया गया है. दीवार लेखन के काम में फिलहाल अभी तृणमूल सबसे आगे है, जबकि भाजपा और कांग्रेस पिछड़ती हुई नजर आ रही है. प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार 25 अप्रैल से 28 अप्रैल के बीच सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव होने की संभावना है. वर्ष 2009 के मुकाबले इस बार का चुनाव अपने आप में अलग होने की संभावना है.

2009 से लेकर अब तक राजनैतिक परिस्थितियों में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है. सिलीगुड़ी नगर निगम क्षेत्र शुरू से ही वाम मोरचा का गढ़ रहा है और पहली बार वर्ष 2009 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस तथा कांग्रेस ने मिलकर वाम मोरचा के इस गढ़ को ध्वस्त कर दिया. हालांकि दोनों दलों ने उस चुनाव में जीत हासिल की लेकिन मेयर पद पर बात नहीं बनने के कारण दोनों दल मिलकर बोर्ड नहीं चला सके. कांग्रेस ने अकेले बोर्ड का गठन किया था. हालांकि बाद में तृणमूल कांग्रेस के साथ कांग्रेस की बात बन गई और डिप्टी मेयर का पद तृणमूल कांग्रेस को दिया गया. फिर काफी दिनों तक दोनों दल मिलकर बोर्ड चलाते रहे.

बाद में एक बार फिर से बात बिगड़ गई और तृणमूल कांग्रेस बोर्ड से अलग हो गई. परिस्थिति ने करवट बदला और पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही कांग्रेसी मेयर गंगोत्री दत्ता ने अपने पद से इस्तीफा देकर बोर्ड भंग कर दिया और तब से प्रशासक की निगरानी में सिलीगुड़ी नगर निगम का काम-काज चल रहा है. इस बार जो हालात हैं उसके अनुसार सभी प्रमुख राजनैतिक दल नगर निगम पर कब्जा करना चाहते हैं, यही वजह है कि तमाम दलों के दिग्गज इस बार चुनाव मैदान में उतरेंगे.

तृणमूल कांग्रेस की ओर से उत्तर बंगाल विकास मंत्री गौतम देव स्वयं मोरचा संभाल रहे हैं. वह वार्ड नंबर 15 से चुनाव लड़ेंगे. एक बातचीत के दौरान श्री देव ने बताया कि सिलीगुड़ी नगर निगम क्षेत्र के विकास के लिए यह जरूरी है कि यहां तृणमूल का बोर्ड बने. उन्होंने कहा कि उन्हें किसी भी पार्टी से कोई चुनौती नहीं मिल रही है. उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस बोर्ड पर सभी मोरचे पर विफल होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस कहीं भी मुकाबले में नहीं है. वाम मोरचा और भाजपा के संबंध में उन्होंने कहा कि हाल में संपन्न वनगांव तथा कृष्णानगर में हुए उपचुनावों में दोनों ही दलों को अपनी हैसियत का एहसास हो गया है. उन्होंने कहा कि वह सभी 47 सीटों पर जीत हासिल करने का लक्ष्य लेकर मैदान में उतरेंगे. तृणमूल कांग्रेस के जिला महासचिव मदन भट्टाचार्य का कहना है कि नगर निगम चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की भारी जीत होगी.

राज्य में ममता बनर्जी के नेतृत्व में जिस प्रकार से विकास के कार्य हो रहे हैं उसको देखकर सिलीगुड़ी के लोग तृणमूल कांग्रेस को ही नगर निगम चुनाव में जीत दिलाएंगे. दूसरी तरफ वाम मोरचा के प्रमुख घटक दल माकपा एक बार फिर से अपनी खोयी जमीन को पाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती.

यही वजह है कि पार्टी ने उत्तर बंगाल में अपने सबसे बड़े नेता तथा पूर्व मंत्री अशोक भट्टाचार्य को मैदान में झोंक दिया है. अशोक भट्टाचार्य स्वयं भी नगर निगम का चुनाव लड़ेंगे. राज्य कमेटी ने उन्हें चुनाव लड़ने का निर्देश दिया है. हालांकि अभी वह किस वार्ड से चुनाव लड़ेंगे, यह अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन पार्टी सूत्रों ने बताया है कि उनके वार्ड नंबर 45 से लड़ने की संभावना है. इस संबंध में अशोक भट्टाचार्य का कहना है कि कांग्रेस तथा तृणमूल कांग्रेस बोर्ड के प्रदर्शन को सिलीगुड़ी के लोगों ने देख लिया. वाम मोरचा का कब्जा 20 वर्षो तक सिलीगुड़ी नगर निगम पर था और तब वाम मोरचा ने सिलीगुड़ी के विकास के लिए कितना अधिक कार्य किया था, यह लोग समझ रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस तथा तृणमूल कांग्रेस के बोर्ड बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुए हैं. इसके अलावा सैकड़ों करोड़ रुपये का एसजेडीए घोटाला हुआ है. चुनाव में वह भ्रष्टाचार को प्रमुख मुद्दा बनायेंगे. दूसरी तरफ कांग्रेस और भाजपा भी चुनावी तैयारियों में जुटी हुई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा विधायक शंकर मालाकार मैदान में उतरेंगे कि नहीं, यह अभी तय नहीं है, लेकिन भाजपा के तमाम आला नेता चुनावी मैदान में उतरेंगे.

क्या है आंकड़ा

सिलीगुड़ी नगर निगम में कुल 47 सीटें हैं. पिछली बार के चुनाव में कांग्रेस को 15, तृणमूल कांग्रेस को 15 तथा वाम मोरचा को 17 सीटें हासिल हुई थी. वर्ष 2009 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस तथा कांग्रेस ने मिल कर चुनाव लड़ा था. इस बार कांग्रेस तथा तृणमूल कांग्रेस अलग-अलग चुनाव लड़ रही है.

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