जलपाईगुड़ी चाय नीलाम केंद्र का हाल-बेहाल

जलपाईगुड़ी. जलपाईगुड़ी चाय नीलाम केन्द्र की स्थिति लगातार बद से बदतर होती जा रही है. नीलामी के लिए चाय नहीं आने के कारण इस नीलाम केन्द्र के अधिकारी परेशान हैं. इस नीलाम केन्द्र को राहत देने के लिए वैल्यू ऐडेड टैक्स (वैट) में छूट की मांग की गई है. इस चाय नीलाम केन्द्र के अधिकारियों […]

जलपाईगुड़ी. जलपाईगुड़ी चाय नीलाम केन्द्र की स्थिति लगातार बद से बदतर होती जा रही है. नीलामी के लिए चाय नहीं आने के कारण इस नीलाम केन्द्र के अधिकारी परेशान हैं. इस नीलाम केन्द्र को राहत देने के लिए वैल्यू ऐडेड टैक्स (वैट) में छूट की मांग की गई है. इस चाय नीलाम केन्द्र के अधिकारियों ने इस मांग को लेकर एक फैक्स भी राज्य के वित्त सचिव को भेजा है. इस चाय नीलाम केन्द्र की स्थापना 2005 में हुई थी और तब से ही इसका हाल-बेहाल है.

चाय किसान नीलामी के लिए चाय को इस नीलाम केन्द्र पर नहीं लाते हैं. नियमित रूप से चाय नहीं आने के कारण यहां नीलामी प्रक्रिया समय-समय पर बंद कर दी जाती है. चाय व्यवसायियों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी अगर यही स्थिति बनी रही, तो यह चाय नीलाम केन्द्र ही बंद हो जायेगा. इस चाय नीलाम केन्द्र के अधिकारियों का कहना है कि यदि वैट में छूट मिल जाये, तो इस नीलाम केन्द्र को एक बार फिर से खड़ा किया जा सकता है. वैट माफ किये जाने की स्थिति में चाय ब्रोकर्स और बायर्स दोनों ही नीलामी प्रक्रिया में शामिल होंगे. इस संबंध में उत्तर बंगाल चाय नीलाम केन्द्र कमेटी के उपाध्यक्ष पुरोजीत बक्सी गुप्त ने कहा है कि अब तक जीतने भी चाय नीलाम केन्द्र बने हैं, कुछ वर्षो के लिए उन नीलाम केन्द्रों को वैट में छूट दी गई, लेकिन इसका लाभ जलपाईगुड़ी चाय नीलाम केन्द्र को नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि कुछ समय के लिए वैट में छूट देने की अपील राज्य के वित्त सचिव से की गई है.

अगर इस छूट को मंजूरी मिल जाती है तो हो सकता है कि इस चाय नीलाम केन्द्र की स्थिति सुधर जाये. दूसरी तरफ इस चाय नीलाम केन्द्र के इंचार्ज प्रताप राउत का कहना है कि जिले के अधिकांश चाय बागानों से इस नीलाम केन्द्र में चाय नीलाम करने की अपील की गई है. इसके बाद भी जिले के चाय बागान मालिक नीलामी के लिए यहां चाय नहीं लाते हैं. यही कारण है कि बीच-बीच में नीलामी प्रक्रिया बंद कर दी जाती है. पिछली बार 20 जून को यहां चाय की नीलामी हुई थी. उसके बाद चाय की कमी हो गई और तब से ही नीलामी प्रक्रिया बंद है. उन्होंने आगे बताया कि नीलामी के लिए कम से कम 35 सौ किलोग्राम चाय यानि 100 बैग चाय होना जरूरी है. इस नीलाम केन्द्र में एक-दो मौके पर ही इतने चाय के बैग एक समय में उपलब्ध हो पाते हैं.

कब हुई थी स्थापना
इस चाय नीलाम केन्द्र की स्थापना करला नदी के किनारे वर्ष 2005 में हुई थी. राज्य के तत्कालीन वित्त मंत्री निरूपम सेन ने इस अत्याधुनिक चाय नीलाम केन्द्र का उद्घाटन किया था. वर्ष 2005 से 2007 तक इस चाय नीलाम केन्द्र की स्थिति काफी अच्छी थी. तब 10 लाख किलोग्राम चाय की नीलामी हुई थी. उसके बाद वर्ष 2007-08 में यह संख्या काफी कम हो गई. उस वर्ष 1 लाख 45 हजार किलो चाय की नीलामी हुई. वर्ष 2008-09 में चाय की नीलामी मात्र 30 हजार किलो रही. उसके बाद चाय के अभाव में इस नीलाम केन्द्र को बंद कर दिया गया. वर्ष 2012 तक यह बंद रहा.
इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की शुरुआत
एक बार इस चाय नीलाम केन्द्र के बंद होने के बाद प्रशासन एवं चाय बोर्ड ने वर्ष 2012 के मई महीने में फिर से इस नीलाम केन्द्र को खुलवाने की पहल की. चाय व्यवसायियों को आकर्षित करने एवं उनकी सुविधा के लिए नीलामी प्रक्रिया को इलेक्ट्रोनिक सिस्टम से लैस किया गया. इसका थोड़ा लाभ हुआ और वर्ष 2013-14 में 3 लाख किलो से भी अधिक चाय की नीलामी इस नीलाम केन्द्र से हुई.
क्या है नियम
चाय उद्योग से जुड़े लोगों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार किसी भी नीलाम केन्द्र को खोले जाने के बाद दो से पांच वर्षो तक वैट में छूट दी जाती है. पश्चिम बंगाल में तीन नीलाम केन्द्र हैं और पूरे भारत में चाय नीलाम केन्द्रों की संख्या 9 है. इनमें से जलपाईगुड़ी नीलाम केन्द्रों को छोड़कर सभी नीलाम केन्द्रों को कुछ वर्षो के लिए वैट में छूट दी गई. इस नीलाम केन्द्र को भी वैट में छूट दिये जाने की मांग को लेकर कई बार पहल की गई, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ.

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