उफान : गोजमुमो व गोरामुमो के बीच बढ़े टकराव के आसार
सिलीगुड़ी : गोरामुमो के संस्थापक तथा दो दशक तक दाजिर्लिंग गोरखा पार्वत्य परिषद के सत्ता पर काबिज रहने वाले सुभाष घीसिंग के निधन के बाद से दाजिर्लिंग पर्वतीय क्षेत्र में राजनीतिक पारा उफान पर है. सुभाष घीसिंग के निधन के बाद पहाड़ के लोगों की सहानुभूति उनके परिवार तथा उनकी पार्टी के साथ हो गयी है.
यही कारण है कि पिछले चार-पांच वर्षो से जहां गोरामुमो के तमाम नेता और समर्थक या तो पहाड़ छोड़ चुके थे या फिर बिमल गुरूंग के नेतृत्व वाली गोजमुमो में शामिल हो गये थे, वहीं वर्तमान में गोरामुमो के समर्थक पार्टी का झंडा लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं. गोरामुमो के प्रति लोगों में सहानुभूति की लहर से गोजमुमो नेताओं की चिंता काफी बढ़ गई है. इसके साथ ही पर्वतीय क्षेत्र के पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारी भी आने वाले दिनों में हालात बिगड़ने को लेकर आशंकित हैं.
वर्ष 2009 में बिमल गुरूंग जब पहाड़ पर एक बड़े नेता के रूप में उभरे, तो उन्होंने कुछ ही दिनों के अंदर सुवास घीसिंग के नेतृत्व वाली गोरामुमो का पहाड़ से सफाया कर दिया. स्थिति इतनी खराब हो गई कि सुवास घीसिंग को भी अपना घर-बार छोड़ कर जलपाईगुड़ी में शरण लेना पड़ गया था. उसके बाद से घीसिंग की स्थिति लगातार बिगड़ती गई और वह अपने मौत तक स्थायी रूप से कभी भी दाजिर्लिंग नहीं लौट सके. सुवास घीसिंग के निधन के बाद पहाड़ के लोगों को लगता है कि उनके साथ नाइंसाफी हुई. गोजमुमो नेता बिमल गुरूंग उन्हें सुवास घीसिंग पर कई बार भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया था लेकिन बताते हैं कि अंतिम समय में सुवास घीसिंग के पास इलाज तक के पैसे नहीं थे.
इतना ही नहीं, जलपाईगुड़ी में रहते जब सुवास घीसिंग की पत्नी का निधन हुआ था तो वह पत्नी की अंतिम संस्कार के लिए शव को लेकर दाजिर्लिंग नहीं जा सके थे. गोजमुमो समर्थकों ने उन्हें दाजिर्लिंग नहीं आने दिया था. बाध्य होकर सुवास घीसिंग ने अपनी पत्नी का अंतिम संस्कार सिलीगुड़ी में किया था. पर्वतीय मामलों पर नजर रखने वाले प्रमुख राजनीतिक विश्लेषक शिबू छेत्री ने बताया है कि सुवास घीसिंग के निधन के बाद से गोरामुमो के पक्ष में सहानुभूति लहर है. यही कारण है कि गोजमुमो के साथ इन दिनों गोरामुमो समर्थकों का टकराव हो रहा है.
पहले जहां गोरामुमो समर्थक चुपचाप बैठे हुए थे, वहीं अब वह खुलकर सामने आ रहे हैं. आने वाले दिनों में इस टकराव के और अधिक बढ़ने की आशंका है. इस बीच, सुवास घीसिंग के पुत्र मोहन घीसिंग जो वर्तमान में गोरामुमो के प्रमुख हैं, अपनी पार्टी के विस्तार में लगे हुए हैं. गोरामुमो के कन्वेनर एमजी सुब्बा ने बताया है कि आने वाले दिनों में विभिन्न स्थानों पर गोरामुमो द्वारा पथ सभा आदि का आयोजन किया जायेगा. दूसरी तरफ गोजमुमो नेताओं ने भी गोरामुमो को टक्कर देने की तैयारी कर ली है.
गोजमुमो नेताओं ने गोरामुमो के विरूद्ध आक्रामक रूख अख्तियार कर लिया है.
यही कारण है कि माने भंजन ने दोनों दलों के समर्थकों के बीच हुई झड़प को लेकर मोरचा नेताओं ने गोरामुमो पर आरोप लगाने शुरू कर दिये हैं. इस पूरे मामले को बिमल गुरूंग पर हमले के रूप में प्रचारित किया जा रहा है. गोजमुमो के दो बड़े नेताओं रोशन गिरी तथा विनय तामंग ने गोरामुमो समर्थकों पर बिमल गुरूंग पर हमले की कोशिश का आरोप लगाया है. इस मामले को लेकर गोजमुमो ने दाजिर्लिंग पहाड़ पर बड़े पैमाने पर अभियान छेड़ दिया है. गोरामुमो समर्थकों को आक्रामक बताने के लिए गोजमुमो ने बिमल गुरूंग की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है. इस बीच, पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आने वाले दिनों में पहाड़ पर राजनैतिक संघर्ष को रोकने के लिए सभी तैयारियां की जा रही है.
