आज सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंच के अध्यक्ष सुनील कुमार सरकार ने बताया कि भक्तिनगर थाना सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के तहत है, लेकिन इस थाने में दर्ज मामले की सुनवाई जलपाईगुड़ी कोर्ट में होती है. इसकी वजह से न्याय पाने के लिए आम लोग परेशान हो रहे हैं और यहां के लोगों को 50 किलोमीटर दूर जलपाईगुड़ी का चक्कर काटना पड़ रहा है. इस समस्या को लेकर तमाम प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी ज्ञापन दिया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. 10 हजार से अधिक लोगों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन दिये जाने के बाद भी सरकार ने इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की.
उन्होंने कहा कि सिलीगुड़ी में मेट्रोपोलिटन कोर्ट के गठन किये बगैर ही मेट्रोपोलिटन पुलिस का गठन कर दिया जाना सही नहीं था और अगर मेट्रोपोलिटन पुलिस का गठन किया गया, तो इसके साथ ही मेट्रोपोलिटन कोर्ट का गठन भी करना चाहिए था. सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस के गठन के तीन साल से अधिक हो गये हैं, लेकिन मेट्रोपोलिटन कोर्ट बनाने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई.
उन्होंने जलपाईगुड़ी मेट्रोपोलिटन कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को लेकर भी सवाल उठाये. उन्होंने कहा कि संविधान की धारा 16 के तहत मेट्रोपोलिटन कोर्ट स्थापित नहीं किये जाने की स्थिति में जूडिशियल मजिस्ट्रेट के अधीन ही मुकदमे की सुनवाई होनी चाहिए. किसी और मेट्रोपोलिटन पुलिस में दर्ज मामले की सुनवाई किसी अन्य मेट्रोपोलिटन कोर्ट में नहीं हो सकती.
यह कानूनी रूप से भी गलत है. उन्होंने मेट्रोपोलिटन कोर्ट नहीं बनाये जाने तक भक्तिनगर थाने में दर्ज मामले की सुनवाई सिलीगुड़ी जूडिशियल मजिस्ट्रेट के कोर्ट में कराने की मांग की. उन्होंने इसके लिए प्रशासन को एक महीने का अल्टीमेटम दिया है. ऐसा नहीं होने की स्थिति में जलपाईगुड़ी सीजेएम कोर्ट में अधिकार क्षेत्र को लेकर मुकदमा करने की भी धमकी दी. संवाददाता सम्मेलन में संगठन के सचिव रतन बनिक, सलाहकार सोमनाथ चटर्जी, निहार चाकी आदि भी उपस्थित थे.
