बैंकिंग सुविधा के अभाव में चाय बागानों को परेशानी

नागराकाटा : केंद्र सरकार द्वारा आगामी एक सितंबर से एक करोड़ रुपये नकद की बैंक से निकासी को लेकर दो फीसदी टीडीएस कटने को लेकर अभी तक कोई समाधान सूत्र नहीं निकला है. इस वजह से चाय बागान प्रबंधन पशोपेश में हैं. उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने यह नियम लागू करने का फैसला लिया […]

नागराकाटा : केंद्र सरकार द्वारा आगामी एक सितंबर से एक करोड़ रुपये नकद की बैंक से निकासी को लेकर दो फीसदी टीडीएस कटने को लेकर अभी तक कोई समाधान सूत्र नहीं निकला है. इस वजह से चाय बागान प्रबंधन पशोपेश में हैं. उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने यह नियम लागू करने का फैसला लिया है.

हालांकि चाय बागानों ने केंद्र सरकार को पत्र देकर इस नियम से छूट की मांग की है. चूंकि चाय बागान इलाकों में बैंकिंग सुविधा का अभाव है. इसलिये बैंक खातों में वेतन ट्रांसफर की व्यवस्था करना संभव नहीं लगता है. लेकिन अभी तक केंद्र सरकार ने इस पत्र पर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है.
वहीं, चाय बागान प्रबंधन का एक वर्ग यह भी मानता है कि अगर केंद्र सरकार छूट देने में असमर्थ है तो उसे बागान क्षेत्र में बैंकिंग सेवा की व्यवस्था करने के लिये आगे आना होगा. इस संबंध में जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और कूचबिहार के जिला प्रशासन को बागान मालिकों के संगठन टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया टाई के पक्ष से पत्र दिया गया है.
संगठन की डुआर्स शाखा के सचिव राम अवतार शर्मा ने बताया कि टीडीएस से छूट के लिये आवेदन दिया गया है. लेकिन अभी तक उसका कोई उत्तर नहीं मिला है. उन्होंने इस संकट के लिये मुख्य रुप से बागान क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधा का अभाव बताया है.
एक अन्य संगठन डीबीआईटीए के सचिव सुमंत गुहा ठाकुरता ने बताया कि टीडीएस चालू होने से इसका सर्वाधिक असर चाय बागानों पर पड़ेगा. इससे बचने के लिये ऑनलाइन सुविधा एक विकल्प है.
लेकिन वह भी बैंकिंग सुविधा के अभाव में व्यावहारिक नहीं लगता है. इस व्यवस्था को लागू करने के लिये बागान इलाकों में बैंकों की शाखायें खोलनी पड़ेगी. तब जाकर इस समस्या का समाधान होगा.
उधर, चाय श्रमिकों के ज्वाइंट फोरम के प्रमुख संयोजक मणि कुमार दर्नाल ने कहा कि बागान श्रमिकों को मजदूरी नकदी में देने की पुरानी परंपरा है. बैंकों के बिना खाते में वेतन ट्रांसफर भी संभव नहीं है. फोरम के पक्ष से भी केंद्र सरकार से टीडीएस को लेकर बागानों को छूट देने के लिये पत्र दिया गया है.
उधर, बागान मालिकों का कहना है कि एक एक चाय बागान को 20-20 करोड़ रुपये वेतन के रुप में भुगतान करना होता है. इसका मतलब हुआ कि 20 करोड़ रुपये पर टीडीएस 40 लाख रुपये यों ही निकल जायेंगे.
यह नुकसान कोई बागान नहीं चाहेगा. हालांकि टीडीएस वापस हो जाता है लेकिन उसकी प्रक्रिया अत्यंत जटिल है. इससे प्रति किलो चायपत्ती की लागत पांच रुपये बढ़ जायेगी. सांसद जॉन बारला ने कहा कि इस बारे में वह जल्द केंद्र सरकार से बात करेंगे.

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