बिना वेतन के काम कर रहे चौकीदार

सात वर्षों से बंद है बागान, सामानों की रखवाली में जुटे हैं चौकीदार पेंशन पाने की उम्र में भी चौकीदारी करने की मजबूरी चामुर्ची : देश भर चौकीदार की हो रही चर्चा के बीच वास्तविक रूप से चामुर्ची में चौकीदार के तौर पर लंबे समय से काम कर रहे श्रमिकों का दर्द उभर कर सामने […]

सात वर्षों से बंद है बागान, सामानों की रखवाली में जुटे हैं चौकीदार

पेंशन पाने की उम्र में भी चौकीदारी करने की मजबूरी
चामुर्ची : देश भर चौकीदार की हो रही चर्चा के बीच वास्तविक रूप से चामुर्ची में चौकीदार के तौर पर लंबे समय से काम कर रहे श्रमिकों का दर्द उभर कर सामने आ गया है. उनका कहना है कि चौकीदारों द्वारा सेवा करने के बदले उन्हें जो मिलना चहिये, उसके लिये वे मोहताज हैं. यह दर्द बानारहाट थाना अंतर्गत रेडबैंक चाय बागान के चौकीदारों की है, जो सात वर्षों से बागान बंद होने के बावजूद संपत्ति की रखवाली कर रहे हैं. बागान के संपत्ति की सुरक्षा करने में वे अपना जीवन को झोंक रखा है.
सिर्फ इस उम्मीद में कि बागान खुलेगा और उन्हें उनका हक जरूर मिलेगा. ये चौकीदार प्रबंधक के बंगलो, फैक्ट्री व अस्पताल की सुरक्षा कर रहे हैं. बागान के प्रत्येक चौकीदार आपस में समय बांटकर 24 घंटे पहरेदारी इमानदारी पूर्वक कर रहे हैं. बागान बंद रहने के कारण उनको पारिश्रमिक देने वाला भी कोई नहीं हैं.
100 दिन के काम करने के बावजूद भी नियमित रूप से रकम नहीं मिलने का आरोप श्रमिकों ने लगाया है. चौकीदार प्रधान लोहार, शीतल मुंडा, पेरू उरांव और उत्तम बनिक का कहना है कि बागान जब बंद हुआ तो उस दौरान मेरी उम्र 52 साल थी और भी 62 वर्ष का हो गया हूं. पेंशन पाने की उम्र में भी चौकीदारी कर रहा हूं. उम्मीद है कि जल्द ही बागान खुलेगा और हमलोगों को लाभ मिलेगा.

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