सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी के बेटे ने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना जल धरो, जल भरो के सापेक्ष में एक यंत्र तैयार किया है. इस यंत्र से लोक स्वास्थ यांत्रिकी द्वारा मुहैया पेयजल की क्षति को काफी बचाया जा सकता है. छात्र का नाम पृथ्वीजीत गांगुली है.
पृथ्वीजीत की कारगरी से खुश होकर सिलीगुड़ी के वरिष्ठ तृणमूल नेता सह समाजसेवी मदन भट्टाचार्य ने उसकी पूरी पढ़ाई-लिखाई का जिम्मा ले लिया है. साथ ही उसके द्वारा बनाये इस यंत्र की स्वीकृति के लिए राज्य सरकार से भी बातचीत करने का भरोसा दिया है. इस कारनामे से उसके परिवार, पड़ोसी, मित्र व शिक्षक नाज कर रहे हैं.
जानकारी के मुताबिक पृथ्वीजीत गांगुली सिलीगुड़ी वरदाकांत हाइ स्कूल के बारहवीं (विज्ञान) का छात्र हैं. माध्यमिक में भी उसने आशातीत सफलता अर्जित की थी. एस्ट्रोफिजिस्ट की दिशा में पृथ्वीजीत उच्च शिक्षा अर्जित करना चाहता है. उसने एक ऐसा यंत्र बनाया है, जिससे टाइम नल से नष्ट होने वाले पेयजल को बचाया जा सकता है.
इसके लिए राज्य सरकार को इस यंत्र को स्वीकृति देकर टाइम नल में उपयोग करना होगा. 1 टाइम नल के लिए यंत्र बनाने में भी ज्यादा नहीं मात्र 100 रूपए के करीब खर्च होगा. पृथ्वीजीत ने इस यंत्र का नाम पैडल टैप रखा है. पृथ्वी ने बताया कि पैडल टैप को टाइम नल बैठाये जाते समय ही लगाना होगा. उसने आगे बताया कि टाइम नल से पेयजल भरने के लिए एक चबुतरा बनाया जाता है.
पैडल टैप को चबुतरा में ही बैठाना होगा. जब कोई व्यक्ति पेयजल भरने के लिए चबुतरे पर बरतन या जरकिन रखेगें तो नल से स्वत: ही पेयजल गिरने लगेगा, जबकि बरतन हटाते ही नल से जल गिरना बंद हो जायेगा. इससे पेयजल को नष्ट होने से काफी हद तक संरक्षित किया जा सकेगा.
अभी भी टाइम नलों में टैप लगाया जाता है. लेकिन अधिकांशत: टैप चोरी हो जाती है या टूट जाता है. पूरे विश्व में जल संरक्षण पर अभियान चलाया जा रहा है. भारत में भी जल संरक्षण के लिए कई वैज्ञानिक तरीके अपनाये जा रहे हैं. पृथ्वीजीत ने बताया कि पैडल टैप के उपयोग से टाइम नलों में टैप लगाने की आवश्यकता नहीं है.
सिलीगुड़ी के नागरिकों के लिए फूलबाड़ी तीस्ता बैरेज से वैज्ञानिक पद्धति से साफ किया गया पेयजल जिस परिमाण में पीएचई मुहैया कराती है, पैडल टैप उपयोग करने से उसके आधे से कम परिमाण में ही मांग पूरा किये जाने का दावा पृथ्वीजीत ने किया है. उसका कहना है कि जितना पानी लोग भरकर ले जाते हैं, उससे कहीं ज्यादा तो नाले में गिरकर नष्ट हो जाता है.
पृथ्वीजीत के पिता पेशे से पुजारी हैं. उसकी मां लकवा की शिकार है. परिवार की आर्थिक स्थिति काफी बेहतर नहीं होने के बाद भी पृथ्वीजीत लगन से मेहनत कर रहा है. खबर मिलते ही तृणमूल नेता सह समाजसेवी मदन भट्टाचार्य पृथ्वीजीत के घर पहुंचे. इस कारनामे के लिए उन्होंने पृथ्वीजीत को गुलदस्ता देकर मान बढ़ाया. साथ ही उसकी पढ़ाई-लिखाई का जिम्मा भी उन्होंने अपने कंधो पर ले लिया है.
