दार्जिलिंग : गोर्खालैंड के विषय को लेकर तैयार किये गये प्रस्ताव पर नेशनल गोर्खालैंड कमेटी दिल्ली की बैठक में चर्चा करेगा. स्थानीय जिमखाना हॉल में नेशनल गोर्खालैंड कमेटी ने पहाड़ के राजनीतिक दलों और विभिन्न संघ-संस्थाओं के नेतृत्वगणों के साथ रविवार को बैठक की. आयोजित बैठक में नेशनल गोर्खालैंड कमेटी के चेयरमैन शक्ति गुरूंग स्वंय उपस्थित रहे. इसी तरह से अन्य नेतृत्वगणों में मनीष तमांग, केके लोहार, तिलक कुमार देवान, सुकमान देवान आदि उपस्थित थे.
बैठक में पहाड़ के प्रायः सभी राजनीतिक दलों के नेतृत्वगणों और सामाजिक संघ-संस्थाओं के नेतृत्वगण उपस्थित थे. बैठक के बाद पत्रकारों से रूबरू होते हुये मनीष तमांग ने कहा कि नेशनल गोर्खालैंड कमेटी के वरिष्ठ कार्यकर्ता एंव पूर्व प्रशासनिक अधिकारी केके लोहार ने प्रस्तावित गोर्खालैड के मानचित्र और गोर्खालैंड गठन होने पर उसका संचालन कैसे किया जायेगा, प्रस्तावित गोर्खालैंड में कितने विधायक होंगे, कितने संसद होंगे, प्रस्तावित गोर्खालैंड का मानचित्र कहां से कहां तक रहेगा आदि विषयों का उल्लेख किया गया है.
एक प्रश्न के जवाब में प्रा तमांग ने कहा कि विगत के गोर्खालैंड समर्पित राजनीतिक दलों ने पहाड़ से लेकर तराई-डुआर्स को मिलाकर गठन करने की मांग करती रही है. नेशनल गोर्खालैंड कमेटी के प्रस्तावित गोर्खालैंड के मानचित्र में वह भी रहेगा. इसके साथ-साथ दूसरा जलपाइगु़डी और कुचबिहार का भी समावेश किया गया है.
उस क्षेत्र के लोग नेशनल गोर्खालैंड कमेटी के प्रस्ताव को स्वीकार करेंगे, इसके जबाब में श्री तमांग ने कहा कौन स्वीकार करेगा और कौन नहीं करेगा, यह बाद की बात है. परंतु इस वक्त गोर्खालैंड के विषय पर पक्ष और विपक्ष दोनों में चर्चा होना जरूरी है. बातचीत के दौरान तमांग ने कहा कि सप्ताह भर के भीतर नेशनल गोर्खालैड कमेटी द्वारा तैयार किये गये दस्तावेज को सभी राजनीतिक दलों के नेतृत्वगणों को सौंपा जायेगा. उस पर लिखित सुझाव भी मांगा जायेगा और उक्त सुझाव पर आगामी 18 नवम्बर को दिल्ली में सम्पन्न होने जा रहे बैठक में चर्चा करके क्या करना है, उस पर निर्णय लिया जायेगा.
