चाय श्रमिकों को मिले 500 रुपये न्यूनतम मजदूरी

सिलीगुड़ी : भारतीय चाय उद्योग का एक बड़ा हिस्सा उत्तर बंगाल पर निर्भर है. उत्तर बंगाल का दार्जिलिंग चाय पूरे विश्व में अपने स्वाद के लिए प्रसिद्ध है. इसके बाद भी यहां के चाय श्रमिकों का शोषण हो रहा है. चाय श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिल रही है. चाय श्रमिकों को 159 रूपये […]

सिलीगुड़ी : भारतीय चाय उद्योग का एक बड़ा हिस्सा उत्तर बंगाल पर निर्भर है. उत्तर बंगाल का दार्जिलिंग चाय पूरे विश्व में अपने स्वाद के लिए प्रसिद्ध है. इसके बाद भी यहां के चाय श्रमिकों का शोषण हो रहा है. चाय श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिल रही है. चाय श्रमिकों को 159 रूपये प्रतिदिन की दर से मजदूरी दी जा रही है.
जिससें वे अपने परिवार तथा अपनी बुनियादी जरूरतों को भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं. मंगलवार को उत्तर बंगाल चाय मजदूर अधिकारी मंच ने नेताओं ने यह बात कही. सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन में इनलोगों ने सरकार से चाय श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी 500 रूपये प्रतिदिन करने की मांग की.उन्होंने राज्य सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की.
मीडिया से बातचीत करते हुए संगठन के अध्यक्ष जेरोम लाकड़ा ने बताया कि चाय तैयार करने में जो मजदूर कमर तोड़ मेहनत करते हैं, उन्हें उनकी मजदूरी ठीक से नहीं मिल पाती है. उन्होंने बताया कि भारत के अन्य राज्यों में न्यूनतम मजदूरी को लागू कर दिया गया है . अगर बात उत्तर बंगाल के चाय श्रमिकों की करें तो अभी भी यहां के श्रमिकों को 159 रुपये के दर से ही मजदूरी मिलती है. जिससे वे अपने परिवार की तो क्या अपनी भी जरुरतें पूरी नहीं कर पाते हैं.
जिससे की आय दिन उत्तर बंगाल के विभिन्न चाय श्रमिक कुपोषण तथा इलाज के अभाव में जान गवां रहे हैं. उन्होंने बताया कि संविधान के आर्टिकल 43 के अनुसार भारत में सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए कृषि उद्योग के हर क्षेत्र में विभिन्न भत्तों की व्यवस्था की गई है. लेकिन उत्तर बंगाल के चाय श्रमिक इससे वंचित रह जाते है. आने वाले समय में चाय उद्योग को बचाए रखने के लिए उत्तर बंगाल के चाय श्रमिकों के लिए 500 रुपये न्यूनतम मजदूरी जरूरी है. संवाददाता सम्मेलन में संगठन की ओर से लिओस हासापुती व अन्य उपस्थित थे.

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