परिवेश के मनो वैज्ञानिक विश्लेषण पर जोर
विजयी प्रतियोगियों का हुआ सम्मान
सिलीगुड़ी : उत्तरबंग हिंदी ग्रंथागार की ओर से डॉ राजेंद्र प्रसाद गर्ल्स हाई स्कूल में प्रधानाध्यापिका संचिता देवनाथ की अध्यक्षता में मनीषा कुलश्रेष्ठ की कहानी ‘बिगड़ैल बच्चे’ को केंद्र में रखते हुए ‘वर्तमान परिदृश्य और हमारे बच्चे’ शीर्षक पर परिचर्चा एवं वक्तव्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया.
बतौर वक्ता शिक्षक दीपू शर्मा ने कहा कि जिन बच्चों को सहज ही बिगड़ा हुआ हम मान लेते हैं. उसके परिवेश का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण अनिवार्य है. इसलिए घृणा रोगी से नहीं, रोग से करने की जरूरत है. तभी सही इलाज हो सकता है. उन्होंने आगे कहा कि जब माता-पिता की जीवन शैली अलग अलग दिशा में व्यस्त हो जाती है तब बच्चे आज गैजेट्स के संपर्क में आते हैं.
जरूरत गैजेट से दूर करने की नहीं है, बल्कि गैजेट्स के इस्तेमाल के लिए जरूरी विवेक को जगाने की है. गजलकार बबीता अग्रवाल ने कहानी में चित्रित बिगड़ैल बच्चे के सेवा कर्म को वर्तमान बच्चों के लिए अनिवार्य बताया. अतिथि देवेंद्र नाथ शुक्ल ने बच्चों की परवरिश के दौरान मर्यादा के सीमांकन को बदलते मूल्यों के संदर्भ में विश्लेषित किए जाने की अनिवार्यता पर जोर दिया. साथ ही बच्चों के साथ माता पिता के परस्पर संबंध के संतुलन की ओर भी संकेत किया. मनीषा गुप्ता ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि वर्तमान परिदृश्य में परिवार अर्थात माता-पिता और बच्चे की दिशाएं अलग-थलग बिखरी पड़ी हुई दिखाई पड़ती है.
ऐसे में सहज ही बच्चों के प्रति बड़ों का नकारात्मक रवैया कभी भी सृजनात्मक नहीं हो सकता.उनके संस्कार की मनोवैज्ञानिक जरूरत है. इस मौके पर ग्रंथागार के सचिव डॉ राजेंद्र प्रसाद सिंह ने बिगड़ैल बच्चे कहानी को पीढ़ीगत द्वंद्व संघात की कहानी बताया और यह कहा कि संस्कार के दौरान ही उपयोगिता बोध का आचरण अनिवार्य हिस्सा है.
‘बिगड़ैल बच्चे’ कहानी को केंद्र में रखते हुए आयोजित वक्तव्य प्रतियोगिता में प्रथम स्थान भारती सिंह, द्वितीय स्थान स्मृति झा एवं तृतीय स्थान विनीता साहनी ने प्राप्त किया. साथ ही चतुर्थ स्थान प्रोत्साहन के रूप में किनारा थापा को प्रदान किया गया. इस अवसर पर सिलीगुड़ी महाविद्यालय की छात्रा प्रियंका भगत, दीप नारायण और पिंकी प्रसाद ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए. ग्रंथागार की अध्यक्ष अर्चना शर्मा नेपाल ने अपने अनुभव के आधार पर बच्चों की परवरिश को समृद्ध करने की जरूरत महसूस कराई. कार्यक्रम संचालन विद्यालय की शिक्षिका डॉ वंदना गुप्ता ने किया.
