गंगतोक : व्यापारिक संगठन सिविन ग्रुप ने राज्य के कई सरकारी स्कूलों में संचालित हो रहे व्यवसायिक शिक्षा (वोकेशनल) के शिक्षकों व कर्मचारियों को निष्काशित कर दिया है. जिसके बाद निष्कासित किये गये 556 शिक्षक व कर्मचारी विरोध पर उतरने के लिए मजबूर हो गये.
बुधवार को सिच्छे स्थित सिविन मुख्यालय पहुंच कर अकारण काम से निष्कासित करने के विरोध में शिक्षकों तथा कर्मचारियों ने सिविन प्रशासन से स्पष्टीकरण की मांग की. राज्य सरकार के मानव संसाधन विकास विभाग ने सिविन को व्यवसायिक शिक्षा के लिए शिक्षक तथा लैव एसिस्टेंटों की नियुक्ति कर संचालन करने की जिम्मेदारी सौपी है.
जिसमें पर्यटन, सूचना तकनीकी, रिटेलर मैनेजमैंट, आइसीटी, फुडप्रोसेरिंग आदि विषय शामिल है. इन विषय के बारे में राज्य सरकार के विभिन्न सरकारी स्कूलों में 556 शिक्षक व लैब असिस्टेंट कार्यरत हैं. जिनमें कई 15 सालों से विभिन्न स्कूलों में कार्य कर रहे हैं. पिछले दिनों इपीएफ लागू करने को लेकर केंद्र सरकार द्वारा प्राप्त रकम को सही रूप से भुगतान नहीं होने तथा सिविन ग्रुप को वेतन वृद्धि करने की मांगें की जाती रही है. परंतु उनके शिकायतों को सुनने के बजाय अचानक ईमेल के जरिए सबको काम से निष्कासित कर दिया गया.
पीड़ितों का कहना है कि 5 से 15 सालों तक सेवा करने वाले शिक्षक और असिस्टेंट है. फिर भी उनको अभी इस हाल में आकर श्रम शोषण कर फेंकने का कार्य कंपनी ने किया है. इसका पुरा विरोध किया जायेगा. कर्मचारियों ने किसी भी हद तक जाकर लड़ने का निर्णय लिया है.
कर्मचारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री पवन चामलिंग से दो बार मुलाकात कर पूरी समस्या के बारे में अवगत कराया गया है. परंतु मुख्यमंत्री ने अभी तक कोई हस्तक्षेप नहीं किया है और इस पर फैसला करने की आस मुख्यमंत्री से लगाए बैठे हैं. उनका कहना है राज्य सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हर तरह के प्रयास किये जा रहे हैं. इसमें वोकेशनल शिक्षा भी शामिल है. ऐसे में किस आधार पर पर्यटन के लिए विद्यार्थियों को नया पेशा के रूप में प्रोत्साहित किया जाए.
पिछले 31 मई से व्यवसायिक शिक्षा के शिक्षक और अन्य कर्मचारियों को काम से निकालने के बाद अभी तक कोई कक्षा शुरू नहीं हुआ है. इससे विद्यार्थियों को बीच साल में कोर्स परिवर्तन के लिए भी परेशानी हो रही है। कंपनी के इस तरह के रवैये से विद्यार्थियों पर असर होने की दावा भी शिक्षकों ने किया है। दुसरी तरफ पिडीतों का कहना है कि इस के बारे में न्यायालय तक जा कर भी न्याय लिया जायेगा
उन का माग है कि आज अकारण नोकरी से निकाल कर ऩई भर्ती के लिए अंतरवार्ता कराया जा रहा है जो जायेज नहीं है इसे रोकना होगा और पुराने शिक्षकों को जो अनुभवी भी है काम पर रखने की माग किया है। दुसरी तरफ सिवन के प्रशासनिक पक्ष से कोई आधिकारीक स्पष्टिकरण और बयान नहीं आ रही है जब कि उन को संपर्क करने के प्रयास करने पर कोई संपर्क नहीं हो पाया.
