सिलीगुड़ी : गोजमुमो नेता तथा जीटीए के पूर्व चीफ बिमल गुरुंग ने आत्मसमर्पण की संभावनाओं से इनकार कर दिया है. उन्होंने साफ-साफ कहा कि है कि वह किसी भी कीमत पर आत्मसमर्पण नहीं करेंगे और जंगलों में रहकर भी अलग गोरखालैंड राज्य की लड़ाई जारी रखेंगे. श्री गुरुंग ने किसी अज्ञात स्थान से ऑडियो टेप जारी किया है. जिसमें श्री गुरुंग ने कहा है कि पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का उनका कोई इरादा नहीं है.
इस बात की अफवाह फैलाई जा रही है कि वह आत्मसमर्पण करने वाले हैं. उन्होंने दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र की जनता से भावुक अपील करते हुए कहा है कि वह ऐसी किसी भी बात पर भरोसा नहीं करें . उनके खिलाफ बड़ी साजिश की जा रही है. तरह-तरह की अफवाहें फैलाई जा रही है. मीडिया से लेकर विरोधी तक अफवाह फैलाने में लगे हुए हैं .वह यह साबित करना चाहते हैं कि विमल गुरुंग आत्मसमर्पण करना चाहते हैं. जबकि वास्तविक स्थिति ऐसी नहीं है. उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ बातचीत होने की बात से भी इनकार कर दिया.
उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ उनकी कोई बातचीत नहीं हुई है. दरअसल इस तरह की अफवाहें गोरखालैंड राज्य की मांग करने वालों का मनोबल तोड़ने के लिए फैलाई जा रही है. वास्तविकता यह है कि वह किसी भी कीमत पर झुकने वाले नहीं हैं और अंतिम सांस तक गोरखालैंड की लड़ाई लड़ते रहेंगे. ऑडियो टेप में श्री गुरुंग ने आगे कहा है कि उनका भरोसा गणतांत्रिक आंदोलन पर है. कुछ महीने पहले पहाड़ पर उन्होंने अलग राज्य की मांग को लेकर गणतांत्रिक आंदोलन ही किया था. किसी भी प्रकार की हिंसा में उनका कोई भरोसा नहीं है.
आने वाले दिनों में भी वह गणतांत्रिक तरीके से ही गोरखालैंड आंदोलन संचालित करते रहेंगे. उन्होंने राज्य सरकार पर करारा हमला भी बोला .श्री गुरुंग ने कहा कि वह तो गणतांत्रिक आंदोलन कर रहे थे. लेकिन राज्य सरकार और पुलिस गणतांत्रिक आंदोलन को कुचलने के लिए अगतांत्रिक तरीके से काम कर रही थी. यही वजह है कि गोरखालैंड आंदोलन के दौरान कई लोगों की पुलिस गोली में मौत हुई. कईयों के घर द्वार जला दिए गए और बड़े पैमाने पर लूटपाट की गई. श्री गुरुंग ने कहा कि गोरखालैंड विरोधी कुछ लोगों के साथ मिलकर राज्य सरकार किसी भी कीमत पर अलग राज्य की मांग को दबाना चाहती है. लेकिन वह ऐसा नहीं होने देंगे.
गोरखालैंड आंदोलन को आगे जारी रखने के लिए ही वह आत्मसमर्पण नहीं कर रहे हैं. वह जंगल- जंगल भटक रहे हैं लेकिन गोरखालैंड की मांग से पीछे नहीं हट रहे हैं. उन्होंने कहा कि विभिन्न सोशल मीडिया के साथ-साथ कई अखबारों एवं टीवी चैनलों में उनके ममता बनर्जी के साथ गुप्त बैठक होने की बातचीत कहीं जा रही है.इस प्रकार की अफवाहें फैलाई जा रही है कि वह ममता बनर्जी से मिलकर आत्मसमर्पण की योजना बना रहे थे . जबकि वास्तविकता से इसका कोई लेना देना नहीं है वह जान दे देंगे, लेकिन अलग गोरखालैंड राज्य की मांग से पीछे नहीं हटेंग.
