20 करोड़ का सजलधारा घोटाला बना चुनावी हथियार

सिलीगुड़ी : आठ वर्ष पहले सिलीगुड़ी महकमा परिषद में हुआ 20 करोड़ का सजलधारा घोटाला इस पंचायत चुनाव में तृणमूल का प्रमुख हथियार बन गया है. तृणमूल नेता अपने प्रचार अभियान में माकपा बोर्ड के कार्यकाल में हुए इस घोटाले को प्रमुखता के साथ रख रहे हैं. इधर पंचायत चुनाव के समय सीआईडी ने इस […]

सिलीगुड़ी : आठ वर्ष पहले सिलीगुड़ी महकमा परिषद में हुआ 20 करोड़ का सजलधारा घोटाला इस पंचायत चुनाव में तृणमूल का प्रमुख हथियार बन गया है. तृणमूल नेता अपने प्रचार अभियान में माकपा बोर्ड के कार्यकाल में हुए इस घोटाले को प्रमुखता के साथ रख रहे हैं. इधर पंचायत चुनाव के समय सीआईडी ने इस छानबीन तेज कर मामले को और सुलगा दिया है. सीआईडी ने महकमा परिषद कार्यालय से घोटाले से जुड़े काफी कागजात जब्त किये हैं.
मिली जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2006-07 में सिलीगुड़ी महकमा परिषद के चार ब्लॉक में कुल 28 सजलधारा परियोजना का अनुमोदन किया था. ग्रामीण इलाके में पेयजल समस्या समाधान के लिए तत्कालीन राज्य सरकार की मांग के अनुसार केंद्र सरकार ने परियोजना को अनुमोदित किया था. जबकि यह घोटाला वर्ष 2010 से 13 के बीच सामने आया. सजलधारा योजना सामने आने के दौरान सिलीगुड़ी महकमा परिषद के सभाधापित माकपा के पास्कल मिंज थे. फांसीदेवा ब्लॉक इलाके में सजलधारा योजना में घोटाला होने की एक रिपोर्ट महकमा परिषद में अधिकारियों ने जमा करायी थी. मामला सामने आते ही फांसीदेवा थाने में एक मामला दर्ज कर घोटाले की जांच शुरू करायी थी. वर्तमान में इस मामले की जांच सीआईडी कर रही है.
दार्जिलिंग जिला शासक जयसी दासगुप्ता ने बताया कि सजलधारा योजना के तहत केंद्र सरकार ने करोड़ो रुपये आवंटित किये थे. इसके बाद भी ग्रामीण लोग पेयजल नहीं मिल रहा है. इस मामले की जांच के दौरान पाया गया है कि कागजों पर जितना काम दिखाया गया है, वास्तविकता उससे कोसों दूर है. पानी की टंकी या पाइपलाइन आदि का काम किये बगैर ही फर्जी दस्तावेज बनाकर रुपये निकाल लिये गये.
इस घोटाले को लेकर राज्य के पर्यटन मंत्री गौतम देव ने कहा कि माकपा दूसरों पर लगे आरोपों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करती है और अपने समय में हुए घोटाले को सबसे छिपाती है. इधर सिलीगुड़ी महकमा परिषद के विरोधी दल नेता काजल घोष ने कहा कि माकपा बोर्ड के कार्यकाल में हुए सजलधारा घोटाले को चुनाव प्रचार में प्रमुखता के साथ लोगों के समक्ष रखा जायेगा. उन्होंने आगे कहा कि वे पंचायत चुनाव प्रचार के लिए डाबग्राम-फूलबाड़ी, कूचबिहार, उत्तर व दक्षिण दिनाजपुर आदि जायेगें. सभी जगहों पर सिलीगुड़ी महकमा परिषद के सजलधारा घोटाले की पोल खोली जायेगी.
इधर, सिलीगुड़ी महकमा परिषद के सभाधिपति तापस सरकार ने बताया कि पंचायत चुनाव के समय इस बात को जानबूझ कर हवा दी गयी है. जिसका लाभ तृणमूल उठाना चाहती है. उन्होंने कहा कि माकपा बोर्ड के समय घोटाला सामने आया था. सजलधारा परियोजना के साथ बोर्ड का कोई संपर्क नहीं था. नियमों का उल्लंघन देखकर ही वर्ष 2014 में मामले की जांच शुरू करायी गयी थी. श्री सरकार ने कहा कि वर्तमान में सीआईडी मामले की जांच कर रही है. जांच एजेंसी को यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट की जांच किये बगैर ही कैसे रुपया उपलब्ध कराया गया, इसकी भी जांच करनी चाहिए.
इसके अतिरिक्त तत्कालीन सभाधिपति पास्कल मिंज ने तृणमूल का दामन थाम लिया था. तो उस समय की बोर्ड भी तृणमूल के नियंत्रण में थी. पंचायत चुनाव में सजलधारा घोटाला को प्रचार अभियान में शामिल करने की तृणमूल की रणनीति पर व्यंग्य करते हुए सभाधिपति तापस सरकार ने कहा कि चलनी सूप से पूछ रही है कि तुममें छेद क्यों हैं. तृणमूल सरकार का शुरू से अब तक का कार्यकाल घोटालों से भरा पड़ा है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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