मालदा : पंचायत चुनाव के साइड इफेक्ट के रुप में मालदा मेडिकल कॉलेज-अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त संकट चरम पर है. ब्लड बैंक के सामने के बोर्ड में रक्त समूहों के सामने शून्य लिखा हुआ है. इससे मरीजों के परिजनों को मायूसी हो रही है. रक्त संकट से खास तौर पर ग्रामीण इलाकों के गरीब थैलेसीमिया के मरीजों को हो रही है. उल्लेखनीय है कि ब्लड बैंक में आम तौर पर 1800 से लेकर 2000 यूनिट रक्त रहता है.
वहीं यह आंकड़ा अब शून्य पर आ गया है. हर माह जिले में न्यूनतम 350 से 400 यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है. उससे भी किसी तरह काम चलाया जाता है. मालदा मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 70-80 यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है. मरीज इन दिनों डोनर की मदद से जरूरतें पूरी कर रहे हैं. उल्लेखनीय है कि मालदा जिले में थैलेसीमिया के करीब 500 मरीज हैं.
प्रत्येक मरीज को महीने में दो बार रक्त चढ़ाना पड़ता है. इन मरीजों में 90 फीसदी ग्रामीण अंचलों के अत्यंत गरीब परिवार से हैं. जिला वॉलेंटियरी ब्लड डोनर्स फोरम के सचिव उत्तम झा ने बताया कि पंचायत चुनाव के चलते रक्तदान शिविर नहीं लग रहे हैं. इस वजह से ब्लड बैंक में रक्त शून्य पर आ गया है. वैसे भी मालदा मेडिकल कॉलेज बनने के बाद से यहां रक्त की मांग बढ़ गयी है. रक्त संकट के चलते मरीजों को डोनर लेकर आना पड़ रहा है. रक्तदान शिविर आयोजित नहीं करने से यह संकट और बढ़ सकता है.
वहीं, मालदा मेडिकल कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल अमित दां ने बताया कि यह सही है कि वर्तमान में ब्लड बैंक में रक्त संकट चल रहा है. लेकिन हाल ही में कॉलेज के चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया था.
