गंगतोक: लंबे समय से सिक्किम की जनता रूमतेक मठ के 17वें करमापा उगेन थिन्ले दोर्जी का इंतजार कर रही है. चीन की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए अब सिक्किम में उनके प्रवेश के लिए केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है. इसको लेकर सिक्किम की जनता और खासतौर पर प्रदेश के बौद्ध अनुयायियों में खुशी की लहर है.
वहीं सिक्किम की सत्ताधारी पार्टी एसडीएफ ने केंद्र सरकार के इस कदम का स्वागत किया है.एसडीएफ की तरफ से प्रेस बयान जारी कर उपाध्यक्ष (प्रचार-प्रसार) दाउछो लेप्चा ने बताया कि सुरक्षा संबंधी कैबिनेट कमेटी ने करमापा के सिक्किम आगमन को मंजूरी दे दी है. इस कमेटी में प्रधानमंत्री बतौर अध्यक्ष के अलावा गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण सदस्य हैं.
उल्लेखनीय है कि एसडीएफ लंबे समय से 17वें कर्मापा को सिक्किम प्रवेश की अनुमति दिलाने के लिए प्रयासरत रही है. यह प्रयास इस बार सफल हुआ है. एसडीएफ ने कहा कि इस सफलता के पीछे मुख्यमंत्री पवन चामलिंग और उनकी सरकार का भगीरथ प्रयास है. एसडीएफ ने इस कदम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार भी व्यक्त किया है.
बौद्ध भिक्षुओं की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई
उल्लेखनीय है कि सिक्किम में करमापा के प्रवेश की अनुमति की मांग को लेकर बौद्ध भिक्षुओं की रिले भूख हड़ताल 630 दिन पूरे कर चुकी है. यह हड़ताल तब तक जारी रखने का एलान किया गया था जब तक कर्मापा सिक्किम की यात्रा पर नहीं आते हैं. बौद्ध भिक्षुओं और मठों का प्रतिनिधित्व करनेवाले संगठन इसे लेकर 2016 में बड़ा आंदोलन शुरू किया था.
