ईंख से दोगुना मुनाफा कमा रहे शांति देवशर्मा

कालियागंज. प्रकृति के वरदान की कोई सीमा नहीं होती. जिन खेतों में जरूरी अनाज की उपज कम होती है, वहां नगदी फसल की पैदावार अधिक होते हुए देखने को मिल रहा है. कालियागंज प्रखंड के मुश्तफानगर में एक किसान शांति देवशर्मा ईख की खेती कर खुशहाली हासिल कर रहे हैं. उनका कहना है कि ईख […]

कालियागंज. प्रकृति के वरदान की कोई सीमा नहीं होती. जिन खेतों में जरूरी अनाज की उपज कम होती है, वहां नगदी फसल की पैदावार अधिक होते हुए देखने को मिल रहा है. कालियागंज प्रखंड के मुश्तफानगर में एक किसान शांति देवशर्मा ईख की खेती कर खुशहाली हासिल कर रहे हैं.
उनका कहना है कि ईख की खेती में कम परिश्रम से दोगुना लाभ हो रहा है. 40 साल के शांति देवशर्मा इन दिनों तीन बीघा जमीन में ईख की खेती कर रहे हैं. उनका कहना है कि ऊंची और तुलनात्मक रूप से कम उपजाऊ जमीन में ईख की फसल अच्छी होती है. हालांकि उनका मानना है कि अगर सरकार इनके जैसे किसानों की मदद करती, तो ईख की खेती को बल मिलता.
इससे ग्रामीण इलाकों की कायापलट हो सकती है.ईख के स्थानीय थोक कारोबारी परिमल सरकार ने बताया कि वे हर साल शांति देवशर्मा से थोक दर पर ईख खरीदते हैं. खुदरा बाजार में प्रति पीस ईख 20 से 50 रुपये में बिकता है. इनके अलावा ईख का जड़ वाला हिस्सा बीज के रूप में इस्तेमाल होता है. इसे लोग दो से तीन रुपये में खरीदते हैं. गर्मियों के मौसम में ईख की बिक्री अधिक होती है. वे बाजार में ईख का रस भी बेचते हैं.
10 से 20 रुपये प्रति गिलास ईख का रस बिकता है. परिमल सरकार ने बताया कि आजकल ग्रामीण इलाकों में ईख के रस की बिक्री अधिक है. बहुत से गांवों में अभी भी पेयजल की सुविधा बहुत ही कम है. इसीलिए लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए ईख के रस का इस्तेमाल करते हैं.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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