आइआर-64 के साथ संकरण से तैयार हुई नयी किस्म
रायगंज : उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय के प्लांट साइंस विभाग के प्रोफेसर सुभाषचंद्र राय ने उत्तर दिनाजपुर जिले के तुलाइपांजी धान को लेकर शोध कर उत्पादन में दोगुनी वृद्धि का दावा किया है. उन्होंने तुलाइपांजी धान के साथ धान की एक उन्नत किस्म आइआर-64 के संकरण से यह संकर किस्म (हाइब्रिड वेराइटी) तैयार की है.
प्रोफेसर राय तुलाइपांजी धान पर लम्बे समय से शोध कर रहे हैं. इस धान के साथ वह बासमती, रंजित आदि धानों का भी संकरण कर रहे हैं. लेकिन आइआर-64 धान के साथ तुलाइपांजी के संकरण से धान के उत्पादन में वृद्धि हो रही है, साथ ही इसका स्वाद और सुगंध भी बरकरार है.
प्रोफेसर राय ने बताया कि इसकी स्वीकृति मिलने पर सभी स्थानों में इस धान की खेती कर तुलाइपांजी के उत्पादन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया जा सकता है. कालियागंज व उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय के अंदर प्रयोगात्मक तरीके से इस धान की खेती की जा रही है. उन्होंने कहा कि वह जल्द ही इस किस्म की स्वीकृति के लिए संबंधित विभाग में नमूना भेजेंगे.
उत्तर दिनाजपुर जिला कृषि विभाग के अधीकारी अयूब अली खान ने बताया कि तुलाइपांजी के स्वाद व गंध को बरकरार रखते हुए उत्पादन को बढ़ाया जाना एक क्रांतिकारी कदम है.
उन्होंने बताया कि प्रोफेसर राय ने कालियागंज के उत्तर काछना गांव व उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय के अंदर इस नये किस्म के धान की खेती की है. उन्होने लैब के अंदर दोनों किस्म के धान का संकरण कर बीज का उत्पादन किया था. आम तौर पर तुलाइपांजी धान की खेती में उत्पादन की कमी, रोग का आक्रमण, खाद के कारण पौधों का गिर जाना आदि समस्या से किसान हतोत्साहित होते है. लेकिन उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राय का दावा है कि इस नये किस्म के धान की खेती कर किसान लाभान्वित होंगे.
