600 परिवार प्रभावित लोगों ने की बैठक
विभिन्न समस्याओं को लेकर हुआ गहन मंथन
कालिम्पोंग : बंगाल सिक्किम सीमा पर राज्य के अंतिम गांव रोम्पु फारेस्ट गांव विभिन्न तरह की समस्याओं से ग्रस्त है. तीस्ता नदी के इस पार बंगाल का रोम्पु है तो उस पार सिक्किम का रोम्पु है. जहां सिक्किम के रोम्पु में विकास की बयार बहती है वहीं, बंगाल के रोम्पु के लोग विकास से अभी कोसों दूर हैं.
राष्ट्रीय राजमार्ग 10 अंतर्गत फारेस्ट की जमीन पर करीब 600 परिवार बसा है जबकि वहां 1200 के करीब वोटर हैं. विकास के नाम पर हर बार चुनाव में जीते प्रतिनिधि आज तक समस्याओं का समाधान नहीं कर सके.
क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर स्थानीय साई मंदिर परिसर में अरुण भगत की अध्यक्षता एक सभा हुई. सभा में मुख्य रुप से क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या पर्चापट्टा, पेयजल समस्या, शौचालय को लेकर चर्चा की गयी. वहीं, सिक्किम की तरफ से बंगाल को जोड़ने वाले एक पुल के कारण विस्थापन के कगार पर पहुंचे 57 परिवारों की समस्या पर भी गहन चर्चा हुई. सभा में रोम्पु फारेस्ट विलेज मोर्चा के शाखा सभापति लोकेश छेत्री, उपाध्यक्ष अरुण भगत, सचिव सुमन टी खत्री मौजूद थे. सभा में राजमार्ग से मोर्चा नेता संजोग गुप्ता भी उपस्थित रहे.
अगर राजमार्ग का विस्तार किया जाता है तो गांववालों पर विस्थापन का खतरा होता है जबकि दूसरी तरफ तीस्ता के किनारे बसे उक्त गांव पर बाढ़ का भी संकट रहता है. तीस्ता नदी के सिक्किम के हिस्से में सुरक्षा दीवार है परन्तु बंगाल की तरफ यह दीवार नहीं है. यहां की एक प्रमुख समस्या पेयजल की है. स्थानीय लोग मोटर के सहारे कुंए से पानी खींच कर काम चलाते हैं. लेकिन बिजली नहीं रहने पर वह भी संभव नहीं. वहीं, सिक्किम की तरफ एनएचडीसीअल बन रहे एक ओवरब्रिज के नीचे करीब 57 परिवारों के विस्थापन का भय पैदा हो गया है.
आज की सभा में विस्थापित होने पर उनके लिये मुआवजे की मांग को लेकर कदम उठाने का निर्णय लिया गया. उल्लेखनीय है कि इस मसले पर स्थानीय मोर्चा इकाई ने जीटीए प्रमुख विनय तामांग से बीते 9 फरवरी को भेंट की थी. विनय तमांग ने रोम्पु में आकर उसका निरीक्षण करने का आश्वासन दिया है. इस संबंध में सीएम तक जानकारी पहुंची है. उन्होंने इस मसले को पार्टी के जिला और शीर्ष स्तर तक ले जाने का भरोसा दिया है.
