काले चावल की मांग ने पकड़ा जोर

पसंद l सुफल बांग्ला के स्टॉल में उमड़ी लोगों की भीड़ सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी शहर में इन दिनों काले चावल को लेकर लोगों में जबरदस्त क्रेज है. माना जाता है कि काला चावल का भात खाने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और कैंसर व अन्य गंभीर बीमारियों के होने की आशंका कम […]

पसंद l सुफल बांग्ला के स्टॉल में उमड़ी लोगों की भीड़

सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी शहर में इन दिनों काले चावल को लेकर लोगों में जबरदस्त क्रेज है. माना जाता है कि काला चावल का भात खाने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और कैंसर व अन्य गंभीर बीमारियों के होने की आशंका कम हो जाती है. इसी वजह से सिलीगुड़ी शहर में काले चावल की मांग ने अचानक जोर पकड़ लिया है. हालत यह है कि सुफल बांग्ला स्टॉल के कर्मचारियों को चावल देने में परेशान होना पड़ रहा है.
मिली जानकारी के अनुसार उत्तर बंगाल में कहीं भी काले चावल का उत्पादन नहीं होता है. इसकी खेती दक्षिण बंगाल के सिर्फ नदिया जिले में होती है. यही कारण है कि उत्पादन और मांग के बीच काफी बड़ा फासला है. सिलीगुड़ी शहर में सुफल बांग्ला दुकान में इस चावल की विक्री हो रही है. रेगुलेटेड मार्केट स्थित सुफल बांग्ला के दुकान में काला चावल खरीदने के लिए सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है. विभागीय अधिकारी सुशांत राय ने बताया है कि मांग इतनी अधिक है
कि उसको पूरा कर पाने में कर्मचारियों के पसीने छूट रहे है. चावल की विशेषता की जानकारी देते हुए श्री राय ने कहा कि इस चावल से बने भात का स्वाद बिल्कुल अलग है. खास तौर पर काले चावल की खीर बनाने की परंपरा ज्यादा रही है. उन्होंने यह भी बताया कि काला चावल खाने से कैंसर की बीमारी का खतरा तो कम होता ही है, साथ ही शरीर को विभिन्न प्रकार के चर्मरोग से भी मुक्ति मिलती है. सभी लोगों को महीने में कम से कम एक बार काला चावल खाना चाहिए. इन्ही विशेषताओं की वजह से शहर में इसकी मांग काफी बढ़ी है.
मांग को लेकर मोबाइल वैन की शुरुआत
अधिक मांग को देखते हुए चावल की विक्री के लिए मोबाइल वैन की भी शुरूआत की गयी है. रेगूलेटेड मार्केट स्थित सुफल बांग्ला दुकान में लोगो की भारी भीड़ को देखते हुए ही मोबाइल वैन शुरू करने का निर्णय लिया गया. सूर्यनगर, कॉलेजपाड़ा, सुभाष पल्ली, उत्तरायण आदि इलाके में सुफल बांग्ला के मोबाइल वैन से काले चावल की खरीद की जा सकती है.
भात बनाना काफी मेहनत का काम
उन्होंने आगे बताया कि इस चावल से भात बनाना काफी मेहनत का काम है. छह घंटे से अधिक समय तक चावल को पानी में भिगो कर रखा जाता है. उसके बाद ही आग पर भात बनाना संभव है. उन्होंने आगे बताया है कि पश्चिम बंगाल सरकार के कृषि विपणन विभाग द्वारा काले चावल की विक्री की जा रही है.

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