वर्षों से परिवारवालों के साथ नहीं है कोई संपर्क
लीगल एड फोरम ने प्रशासन से मांगी रिपोर्ट
सिलीगुड़ी. हाल के दिनों में दूसरे राज्यों में काम करने गये बंगाल के तीन श्रमिकों की मौत के मामले ने पूरे राज्य को झंझोर कर रख दिया है. हालांकि सत्ताधारी पार्टी से लेकर विपक्षी सभी पार्टियां भी एक होकर पीड़ित परिवारों की मदद के लिए आगे आ रही हैं, जिससे मृतक के परिजनों को मानसिक तौर पर बल मिला, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि पता नहीं अब भी राज्य के श्रमिक कहां और किस हालात में होंगे. खासकर चाय बागान के श्रमिकों को लेकर सभी को चिंता है.
डुआर्स के चाय बागान बंद होने के बाद यहां के श्रमिक काम की तालाश में विभिन्न राज्यों में गये. इनमें से ऐसे श्रमिकों की संख्या काफी है जिनका के अपने परिवार वालों से कोई संपर्क इनिदनों नहीं है. इसी को देखते हुए लीगल एड फोरम की ओर से महत्वपूर्ण कदम उठाये जा रहे हैं. इस कानूनी सहायता संगठन ने उत्तर बंगाल के कितने श्रमिक बाहरी राज्यों में काम के लिए गये हैं और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है, पर रिपोर्ट बनाने की तैयारी कर ली है. प्रशासन को रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया है. इसके साथ ही फोरम के दार्जिलिंग जिला कमेटी के महासचिव अमित सरकार ने रिपोर्ट सही समय पर नहीं मिलने पर कलकत्ता हाईकोर्ट में मुकदमा करने की भी धमकी दी है.
यहां उल्लेखनीय है कि 2017 के दिसंबर महीने में पहले मालदा के अफराजुल, उसके बाद गुजरात में अलीपुरद्वार के मधु सरकार की रहस्यजनक परिस्थितियों में मौत हो गयी. इसके साथ ही डुआर्स एवं उत्तर बंगाल के विभिन्न इलाकों से हजारों की संख्या में श्रमिक बाहरी राज्य में काम करने गये और बाद में लापता हो गये हैं. उनके परिवार वालों के पास वर्षों से उनकी कोई खबर नहीं है.
वे जिंदा भी है या नहीं, किसी को नहीं पता. ऐसी स्थिति में परिवार वालों को विभिन्न तकलीफों से गुजरना पड़ रहा है. ये लापता श्रमिक कहां और कैसे है, इसके जानकारी प्राप्त करने के लिए दार्जिलिंग जिला लीगल एड फोरम की ओर से दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी एवं अलीपुरद्वार के जिला शासकों को चिट्ठी भेजी गयी है.
साथ ही राज्य एवं राष्ट्रीय कानूनी परिसेवा प्रबंधन, राज्य मानवाधिकार आयोग व शिशु अधिकार सुरक्षा आयोग के पास भी चिट्ठी भेजी गयी है. चिट्ठी के आधार पर तीनों जिलों में जानकारी हासिल करने का काम भी शुरू हो चुका है. यहां यह भी बता दें कि लीगल एड फोरम ने एक के बाद एक चाय बागानों के बंद होने को लेकर दो साल पहले भी हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी.
इसके बाद ही विभिन्न चाय बागान इलाकों से सैंकड़ों की संख्या में श्रमिकों के लापता होने की बात सामने आयी है. आंकड़े बताते है कि बागडोगरा के गंगाराम चाय बागान से बीते कुछ सालों में 300 से भी ज्यादा श्रमिक लापता हैं. जबकि बागराकोट चाय बागान से 200 से ज्यादा श्रमिक लापता हैं.
ऐसे ही हंटापाड़ा, रेडबैंक सहित विभिन्न चाय बागानों से सैंकड़ो श्रमिक लापता हैं. अधिकांश क्षेत्र में इन लापता लोगों के परिवार वाले कड़ी संघर्ष के बीच गुजर बसर कर रहे है. उन्हें कुछ पता नहीं कि उनके घर के सदस्य कहा हैं.
