नक्सलबाड़ी डीआइ फंड मार्केट की हालत खराब

मछली बाजार के दुर्गंध से लोगों का जीना मुश्किल बतारिया नदी के प्रदूषण में भी भारी बढ़ोत्तरी बार-बार शिकायत के बाद भी प्रशासन ने साधी चुप्पी खोरीबाड़ी : फुटपाथ पर कारोबार करने वाले व्यवसायियों के पुनर्वास को लेकर बने नक्सलबाड़ी डीआइ फंड मार्केट की हालत इन दिनों काफी खराब है. नियमित रूप से रखरखाव तथा […]

मछली बाजार के दुर्गंध से लोगों का जीना मुश्किल

बतारिया नदी के प्रदूषण में भी भारी बढ़ोत्तरी
बार-बार शिकायत के बाद भी प्रशासन ने साधी चुप्पी
खोरीबाड़ी : फुटपाथ पर कारोबार करने वाले व्यवसायियों के पुनर्वास को लेकर बने नक्सलबाड़ी डीआइ फंड मार्केट की हालत इन दिनों काफी खराब है. नियमित रूप से रखरखाव तथा साफ-सफाई के अभाव में डीआइ फंड मार्केट जाकर खरीददारी करना ग्राहकों के लिए किसी दुस्वप्न से कम नहीं है. स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि न तो यहां नियमित रूप से साफ-सफाई होती है और न ही निकासी व्यवस्था ठीक है. इसी वजह से ना केवल यहां के दुकानदार, बल्कि खरीददारी करने वाले ग्राहक भी परेशान होते हैं.
सबसे खराब हालत तो यहां के मछली बाजार की है. मछली बाजार के दुर्गंध से ना केवल यहां के दुकानदार, बल्कि आसपास के लोग भी काफी परेशान हैं. स्थानीय लोगों को किसी बीमारी के फैलने की आशंका सता रही है. ऐसा नहीं है कि मछली बाजार के दुर्गंध तथा प्रदूषण का असर सिर्फ इस बाजार तक ही सीमित है. प्रदूषण की मार पास से बहने वाली बतारिया नदी को भी सहनी पड़ रही है. बाजार में मछली दुकानदार गंदगी इसी नदी में बहा देते हैं. परिणामस्वरूप बतारिया नदी में प्रदूषण की मात्रा काफी बढ़ गयी है.
दुकानदारों तथा स्थानीय लोगों का आरोप है कि दरअसल बाजार के बनाने से पहले यहां के ढांचागत सुविधाओं के विकास की कोई कोशिश नहीं की गई. बाजार बनाकर दुकानदारों को दे दिये गये और एक तरह से प्रशासन का काम खत्म हो गया. इसकी नियमित साफ-सफाई, पेयजल की व्यवस्था, निकासी व्यवस्था आदि ठीक तरह से नहीं की गयी है.
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2000 में तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के शहरी विकास मंत्री अशोक भट्टाचार्य ने डीआइ फंड मार्केट का उद्घाटन किया था. पांच कट्ठा जमीन पर इस मार्केट का निर्माण हुआ है. नीचले तल्ले पर राशन-पानी, दशकर्मा भंडार, मिठाई की दुकान, होटल आदि हैं. जबकि ऊपरी तल्ले पर मछली बाजार है. मछली बाजार तक जाने के लिए जो सीढ़ी बनायी गई है उसकी हालत भी काफी खराब है. सीढ़ी टूटने से कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है. यहां मछली खरीदने आने वाले ग्राहक भी डरे-सहमे रहते हैं. इन लोगों का कहना कि डीआइ फंड मार्केट की व्यवस्था सुदृढ़ करनी चाहिए. सिर्फ यहां के दुकान ही नहीं,
बल्कि आम लोग भी डीआइ फंड मार्केट को दुरुस्त करने की मांग कर रहे हैं. इन लोगों का आरोप है कि सबसे ज्यादा समस्या मछली बाजार को लेकर है. मछली बाजार के अंदर दो दर्जन से अधिक दुकानें हैं. कचरा जमा करने के लिए ऊपरी तल्ले में कोई व्यवस्था नहीं है. परिणामस्वरूप मछली कारोबारी जहां-जहां कचरा फेंक देते हैं. इसके कारण दुर्गंध की समस्या हो रही है.
डीआइ फंड मार्केट प्रबंधन जिम्मेदार : मार्केट कमेटी
मार्केट कमेटी के अध्यक्ष अनिल साहा ने इसके लिए डीआइ फंड मार्केट प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है. उनका कहना है कि डीआइ फंड मार्केट स्थानीय प्रशासन के अधीन है. प्रशासन के द्वारा इसके देख-रेख की कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है. इस मामले में नक्सलबाड़ी ग्राम पंचायत के प्रधान, माकपा के राधा गोविंद घोष ने भी अपना पल्ला झाड़ लिया है. इनका कहना है कि डीआइ फंड मार्केट के रख-रखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की नहीं है. फिर भी समय-समय पर पंचायत द्वारा साफ-सफाई करायी जाती है. स्थानीय लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसी को ध्यान में रखते हुए पंचायत द्वारा बीच-बीच में साफ-सफाई करायी जाती है. इस मामले में स्थानीय प्रशासन को ही पहल करनी होगी.

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