फातिमा गिरजा को स्थानीय लोग पादरी कुटी कहते हैं
आर्थिक अभाव में पहले जैसी भव्यता लौटाना हुआ मुश्किल
जलपाईगुड़ी : शहर से लगे डेंगुआझाड़ चाय बागान इलाके में एक काफी पुराना गिरजाघर है. इस फातिमा गिरजा को स्थानीय लोग पादरी कुटी के नाम से भी जानते हैं. जलपाईगुड़ी शहर से आठ किलोमीटर दूर स्थित यह चर्च 65 साल पुराना है. यहां बड़ा दिन यानी क्रिसमस मनाने की तैयारी अपने अंतिम चरण में है. इस गिरजाघर की एक विशेषता यहां स्थित 25 फुट ऊंचा घंटाघर (क्लॉक टॉवर) है. इसमें लगी इटली की बनी घड़ी काफी दिनों से खराब है. गिरजाघर के पादरी इस घड़ी की मरम्मत पर विचार कर रहे हैं.
सन 1952 में इटली से आये पादरी डेल ऑर्टो ने डेंगुआझाड़ चाय बागान में जमीन लेकर इस चर्च की स्थापना की थी. ये फादर खुद ही आर्किटेक्ट थे. उन्होंने चर्च के साथ-साथ 25 फुट ऊंचा घंटाघर बनवाया. स्थानीय मरियम बस्ती प्राथमिक विद्यालय के अवकाशप्राप्त प्रधान शिक्षक जॉन मरांडी ने बताया कि जंगल से घिरे हुए इस चर्च में आने के लिए घड़ी लगायी गयी थी. घड़ी से हर 30 मिनट पर घंटा बजता था. इसकी आवाज सुनकर डेंगुआझाड़, जयपुर, करला वैली चाय बागान से चाय श्रमिक प्रार्थना करने के लिए आते थे.
इस चर्च के प्रार्थना हॉल के पीछे इतालवी शैली में पादरियों के लिए ड्रेसिंग रूम बना हुआ है. ईसा मसीह की तस्वीर, सलीब पर टंगे ईसा के अलावा गिरजाघर के बाहर मदर मरियम की मूर्ति है. फादर डेल और फादर ऑर्टो के अलावा इटालियन फादर मस्कार्टो और ल्यूकार्टो इस गिरजाघर में काफी समय तक रहे. फादर मस्कार्टो बहुत अच्छा पियानो बजाते थे. गिरजाघर के भारतीय फादर जेरोंग खाखा ने बताया कि यहां बड़ा दिन के उपलक्ष में चाय बागान इलाके में घर-घर में जाकर क्रिसमस कैरोल गाये जाते थे. प्रार्थना गीतों के अलावा लोक गीत भी गाये जाते थे. उन्होंने बताया कि आर्थिक संकट के चलते घड़ी की मरम्मत नहीं करायी जा सकी है.
