सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी मर्चेंट्स एसोसिएशन (एसएमए) के सत्र 2017-19 के कार्यकारिणी बोर्ड के चुनाव को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा. प्रवीण झंवर और गौरीशंकर गुट अब भी आमने-सामने हैं. जैसे-जैसे चुनाव की तारीख 17 दिसंबर नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे चुनावी जंग ‘जुबानी जंग’ में तब्दील होती जा रही है. कारोबारी सदस्यों का भी मानना है कि एसएमए के इतिहास में पहली बार कारोबारियों का आम चुनाव ‘राजनीतिक चुनाव’ जैसा दिखायी दे रहा है.
चुनाव को लेकर हो रहे विवाद पर विराम चिह्न लगाने और चुनाव को लेकर आम सहमति बनाने के लिए मंगलवार को चुनाव अधिकारियों शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता हरिश चंद्र सिंहल व सीए जीतेंद्र मित्तल ने खालपाड़ा के अग्रसेन रोड स्थित एसएमए भवन में दोनों गुटों के प्रतिनिधियों के साथ आपात मीटिंग की. मीटिंग की शुरुआत में ही श्री सिंहल ने चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की भूल-भ्रांति के लिए दोनों गुटों से माफी मांगी. चुनाव अधिकारियों ने चुनावी विवाद को लेकर दोनों गुटों से बातचीत भी की. इस दौरान प्रवीण झंवर गुट ने सत्ता पक्ष यानी गौरीशंकर गुट पर धांधली करने का आरोप लगाया और चुनाव अधिकारियों से चुनाव को ही रद्द कर नये सिरे से पूरी चुनावी प्रक्रिया वापस निष्पक्ष तरीके से करने का प्रस्ताव रखा. चुनाव अधिकारियों ने झंवर गुट के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया. श्री मित्तल ने चुनाव की तारीख तब्दील करने का प्रस्ताव दिया, पर चुनावी प्रक्रिया नहीं.
इस प्रस्ताव पर सत्तापक्ष के अध्यक्ष गोपाल खोरिया, महासचिव गौरीशंकर गोयल, कार्यकारिणी समिति के सदस्य रामप्रताप अग्रवाल ने अपनी सहमति जतायी. लेकिन झंवर गुट ने यह प्रस्ताव को ठुकरा दिया. प्रवीण झंवर अपने गुट के साथियों घनश्याम मालपानी व सुनील अग्रवाल के साथ चुनाव का ही बहिष्कार कर दिया. साथ ही मीटिंग को भी बीच में ही छोड़कर उठ गये.
बाद में चुनाव अधिकारी जीतेंद्र मित्तल ने पहले से ही तय तारीख को ही चुनाव करने का फैसला सुनाया. वहीं, मीटिंग समाप्ति के कई घंटों बाद देर शाम को प्रवीण झंवर ने अपने गुट के उम्मीदवारों के साथ चुनाव अधिकारी के प्रस्ताव पर सहमति दिखाते हुए एक चिट्ठी श्री सिंहल को सौंपी. इस चिट्ठी के जरिये चुनाव की तारीख तब्दील करने के बाद सभी नामांकित उम्मीदवारों के साथ चुनाव लड़ने पर विचार करने की गुजारिश की. लेकिन इस बाबत चुनाव अधिकारी जीतेंद्र मित्तल का कहना है कि इसके लिए पहले ही हमने मीटिंग में प्रस्ताव दिया था. पहले प्रस्ताव को ठुकरा कर मीटिंग से उठ कर चले जाना और बाद में उसे मान लेना, यह कोई बच्चों का खेल नहीं है. मीटिंग में लिया गया फैसला ही मान्य होगा. चुनाव तय तारीख 17 दिसंबर और निर्धारित स्थान एसएमए भवन में ही होगी. चुनाव तारीख की तब्दीली की अब कोई गुंजाइश नहीं बची है.
गौरीशंकर गुट पर सत्ता का दुरुपयोग करने का आरोप
प्रवीण झंवर गुट ने मंगलवार को गल्लामंडी खालपाड़ा के नेहरू रोड स्थित एक मकान में प्रेस-वार्ता आयोजित कर इसबार के चुनाव को लेकर सत्तापक्ष यानी गौरीशंकर गुट पर सत्ता का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया. साथ ही चुनाव प्रक्रिया में धांधली करने का भी आरोप लगाया. एसएमए के कार्यप्रणाली के वर्षों के तजुर्बेकार श्री झंवर ने मीडिया के सामने कहा कि वह 20 वर्षों से विभिन्न पदों के लिए चुनाव लड़ते आ रहे हैं और अब-तक अध्यक्ष, सचिव जैसे कई गरिमामय पद पर रहकर कारोबार से जुड़े हरेक काराबोरियों, दिहाड़ी मजदूरों, ठेला-वैन चालकों के हितों पर काम किया. लेकिन एसएमए के इतिहास में ऐसा चुनाव कभी नहीं देखा गया. मात्र दो वर्षों की अहंकारी सत्तापक्ष अपने सत्ता व पावर का गलत इस्तेमाल कर चुनाव में गड़बड़ी करने की हर हथकंडे अपना रही है. नामांकन पत्र उठाने और जमा देने से लेकर प्रॉक्सी फॉर्म उठाने व चुनावी प्रक्रिया में धांधली मचा रही है. श्री झंवर ने बताया कि सत्तापक्ष के सभी उम्मीदवारों के पास सभी 696 कारोबारी मतदाताओं के नाम और मोबाइल नंबरों के साथ ठिकाने का पूरा विवरण दिया गया है. जिसके आधार पर पूरी सुविधा के साथ चुनाव प्रचार कर रहे हैं. लेकिन विरोधी उम्मीदवारों को केवल मतदाताओं की सूची अधूरे ठिकानों के साथ दी गयी है. साथ ही उन्होंने दो वर्षों के वर्तमान सत्तापक्ष पर एसएमए के संस्थापक सदस्यों व कई वरिष्ठ सदस्यों का अपमान करने का भी आरोप लगाया. श्री झंवर ने दावे के साथ कहा है कि परसराम जी सिंहल, रामनिवास गोयल, भगवति प्रसाद डालमिया, सुजित बोस जैसे एसएमए के दर्जनों सदस्यों को मान्यता न देकर कारोबारी सदस्यों की मतदाता सूची से ही नाम हटा दिया गया है. सत्ता पक्ष की ऐसी धांधलियों को कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. प्रेस-वार्ता के दौरान मौजूद अन्य 13 उम्मीदवार सीताराम डालमिया, घनश्याम मालपानी, सुनील अग्रवाल, मुकेश देवसरिया, सुभाष अग्रवाल, महेंद्र चंगोइवाल, राजेश तायल, पंकज जायसवाल, पंकज कुमार गुप्ता, श्याम मय्या, रमेश चंद्र गुप्ता, सुरेश अग्रवाल, अरविंद सोनी के अलावा निर्दलीय उम्मीदवार प्रकाश बिसलानिया ने भी मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि दो वर्ष पहले सत्ता पक्ष ने जो भी अपने घोषणा पत्र के जरिये वादा किया था अधिकांश घोषणाओं पर आजतक अमल ही नहीं हुआ.
झंवर गुट पर बेवजह विवाद खड़ा करने का आरोप
सत्तापक्ष के अध्यक्ष गोपाल खोरिया ने भी प्रवीण झंवर गुट पर चुनाव को लेकर बेवजह विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया है. उन्होंने विरोधियों द्वारा लगाये गये सभी आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है और न ही धांधली की जा रही है. चुनाव की तारीख तब्दीली के मुद्दे पर श्री खोरिया ने साफ कहा कि मीटिंग में लिया गया फैसला ही हम मानेंगे. मीटिंग में चुनाव अधिकारियों द्वारा लिया गया फैसला ही अंतिम फैसला है. वहीं, एसएमए के गौरीशंकर गोयल ने भी अपने उपर लगाये आरोपों को लेकर एकबार फिर विरोधियों को दो टूक शब्दों में करारा जवाब देते हुए कहा कि यह चुनावी लड़ाई 20वर्ष बनाम दो वर्षों की लड़ाई है.
