नगर निगम के 42 नंबर वार्ड में हिन्दी भाषी प्राथमिक स्कूल नहीं है. जिससे बच्चों को पढ़ने में काफी दिक्कत होती है. इस समस्या को देखते हुए पिछले 42 सालों से इलाके की हीरा देवी गुरुंग उर्फ गुरु अम्मा ने बच्चों को पढ़ाना शुरु किया. उनके पति दिहाड़ी मजदूर थे. पति के गुजर जाने के बाद इस काम में काफी मुश्किलें आने लगी. कभी खूले मैदान में तो कभी किसी के घर के बारमदे में बच्चों को पढ़ाने का काम चल रहा था. आखिरकार पांच साल पहले प्रकाश नगर रॉयल यूथ क्लब परिसर में उन्हें जगह दी गई.
क्लब के सचिव सुरज छेत्री ने बताया की महिला के हौसले एवं महान कार्य को देखते हुए उन्हें क्लब के कमरे में पढ़ाने की इजाजत दी गई है. इस स्कूल के लिए कमेटी बनाकर क्लब की ओर से स्कूल को हर महीने कुछ आर्थिक मदद भी दी जाती है. स्थानीय लोग भी कुछ मदद करते है. कमेटी के माध्यम से स्कूल का रजिस्ट्रेशन भी कराया गया है. स्कूल का प्राथमिक खर्च भी क्लब की ओर से उठाया जाता है.शिक्षिका हीरा देवी ने बताया कि वर्तमान में स्कूल में कुल 20 छात्र-छात्राएं है. उनलोगों की ओर से 30 रुपए प्रतिमाह मिलते हैं. उसी पैसे से उनका गुजारा चलता है. स्कूल की कई समस्याएं भी हैं. कमरे के टीन का छत टूटा-फूटा है. बारिश के समय पानी टपकता है. छात्र-छात्राओं को एक कोने में खड़े रहकर बारिश से बचना पड़ता है. उन्होंने आगे कहा की 42 सालों के बाद भी स्कूल को कोई सरकारी मदद नहीं मिली है. मदद मिलने पर और अधिक संख्या में छात्र-छात्राएं पढ़ाई के लिए आगे आयेंगे.
