गोरखालैंड की आवाज दबाने की कोशिश : छेत्री

राज्य सरकार दे रही पद और रुपये का लोभ अलग राज्य की मांग को दबाना संभव नहीं दार्जिलिंग : राज्य सरकार रुपये और पद का प्रलोभन देकर गोरखालैंड की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है. यह आरोप क्रामाकपा ने लगाया है. रविवार को स्थानीय पार्टी कार्यालय में क्रामाकपा की केंद्रीय कमेटी की बैठक […]

राज्य सरकार दे रही पद और रुपये का लोभ

अलग राज्य की मांग को दबाना संभव नहीं
दार्जिलिंग : राज्य सरकार रुपये और पद का प्रलोभन देकर गोरखालैंड की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है. यह आरोप क्रामाकपा ने लगाया है. रविवार को स्थानीय पार्टी कार्यालय में क्रामाकपा की केंद्रीय कमेटी की बैठक पार्टी प्रमुख आरबी राई की अध्यक्षता में संपन्न हुई. बैठक में केंद्रीय कमेटी के सभी सदस्यों की उपस्थिति रही. करीब तीन घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता गोविंद छेत्री ने पत्रकारों से रू-ब-रू होते हुए कहा कि राज्य सरकार रुपये और पद का प्रलोभन देकर गोरखालैंड की आवाज को सदा के लिए दबाने का काम रही है, लेकिन क्रामाकपा उन राजनैतिक दलों में से नही है, जो ऐसे प्रलोभनों में आकर राजनीति करते हैं
. इसलिए क्रामाकपा के इस रवैये के चलते राज्य सरकार क्रामाकपा को मिटाने का कार्य कर सकती है. लेकिन जब तक इस दुनिया में क्रामाकपा का एक भी सदस्य और समर्थक है तब तक गोरखालैंड की आवाज को कोई भी दबा नही सकता है. बैठक में पिछले दिनों गोर्खालैंड संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा आयोजित दिल्ली संसद चलो अभियान में पार्टी कार्यकर्ताओ ने जिस जोश व खरोश से हिस्सेदारी की थी और पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रमुख आरबी राई के नेतृत्व में दिल्ली के राम लीला मैदान से संसद तक पैदल यात्रा की थी उन पर चर्चा की गई.
गोविंद छेत्री ने कहा कि आने वाले दिनों में गोरखालैंड की मांग को लेकर दिल्ली में किसी भी प्रकार के कार्यक्रम होते हैं तो क्रामाकपा उसमें जरूर शिरकत करेगी. बैठक में आगामी 15 दिसम्बर को पार्टी का 22 वां स्थापना दिवस भव्य रूप से मनाने का निर्णय लिया गया और प्रशासन ने जनसभा की अनुमति दी तो दार्जिलिंग शहर में विशाल जनसभा आयोजित करेगी. यदि प्रशासन ने अनुमति नहीं दी तो अन्य तरीके से पार्टी का स्थापना दिवस मनाया जायेगा. श्री छेत्री ने कहा कि पिछले 23 से 28 नवंबर तक पंजाब के चंडीगढ़ में छोटे-छोटे वामपन्थी दलों ने सेमिनार का आयोजन किया था जिसमें क्रामाकपा ने भी भाग लिया था. सेमिनार में उपस्थित 23 से अधिक छोटे-छोटे वामपन्थी दलों ने एक यूनाइटेट संगठन का प्रस्ताव दिया है, जिसके जरिये क्रामाकपा अपने पक्ष से गोरखालैंड के बारे अपनी बेबाक राय रखेगी.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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