लापरवाह वाहन चालकों पर नकेल की तैयारी, वाहनों में लगेंगे स्पीड लिमिट यंत्र

सिलीगुड़ी: नेशनल हाइवे पर लापरवाह वाहन चालकों की अब खैर नहीं है. ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ कड़ी कार्यवाई की तैयारी कर ली गयी है. ऐसे वाहन चालकों पर लगाम कसने के लिए परिवहन विभाग कड़ा रुख अपना लिया है. दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए गैर सरकारी बसों में स्पीड लिमिट डिवाइस लगाये जा रहे […]

सिलीगुड़ी: नेशनल हाइवे पर लापरवाह वाहन चालकों की अब खैर नहीं है. ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ कड़ी कार्यवाई की तैयारी कर ली गयी है. ऐसे वाहन चालकों पर लगाम कसने के लिए परिवहन विभाग कड़ा रुख अपना लिया है. दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए गैर सरकारी बसों में स्पीड लिमिट डिवाइस लगाये जा रहे हैं. इसका निर्देश भी जारी कर दिया गया है. परिवहन विभाग का निर्देश मानते हुए वाहनों में स्पीड लिमिट यंत्र लगाने का काम शुरू हो चुका है. बगैर इस यंत्र के वाहनों की फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं द जायेगी. इसके साथ ही पुलिस भी विभिन्न सड़कों पर वाहनों की गति जांच कर रही है.
दार्जिलिंग जिले के परिवहन अधिकारी राजेन सुंदास का कहना है कि दुर्घटनाओं को रोकन के लिए वाहनों की गति पर नियंत्रण बेहद जरुरी है. इसके लिए वाहनों में स्पीड लिमिट यंत्र लगाने का निर्देश दिया गया है. यंत्र नहीं लगाने पर गाड़ी को फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं दिया जायेगा. साथ ही रूट परमिट भी रद्द होने की संभावना है.

उल्लेखनीय है कि सिलीगुड़ी-पानीटंकी, सिलीगुड़ी-नक्सलबाड़ी एवं बागडोगरा रुट के बसों में यह यंत्र लगाये जा रहे हैं. परिवहन विभाग सूत्रों से पता चला है कि लम्बी दूरी की बसों में 75 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तय कर दी गई है. चालक अगर इससे तेज गति से चलाना चाहें तो यह यंत्र गति को नियंत्रित करेगी.
गैर सरकारी बसों पर विशेष नजर
परिवहन अधिकारी श्री सुंदास कहा कि सरकारी एनबीएसटीसी की बसों में यह यंत्र पहले से ही है. अब प्राईवेट बसों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है. सिलीगुड़ी मिनी बस ऑनर्स एसोसिएशन के सचिव मृणाल राय ने बताया कि सरकार की इस पहल से दुर्घटनाएं कम होने लगी है. पहले महीने में 20 दुर्घटनाएं होती थी अब वह आधी हो गई है. उन्होंने शहर बाईकों में भी यही यंत्र लगाने की अपील की है. बस मालिकों ने बताया की सिलीगुड़ी में इस समय 120 बसें चल रही है. सरकारी निर्देश के बाद 60 से 70 फीसदी बसों में स्पीड लिमिट यंत्र लगा दिया गया है. इससे दुर्घटनाओं में कमी आयी है.

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