उल्लेखनीय है कि इस इमिग्रेशन चेकपोस्ट से काफी संख्या में लोग भारत व बांग्लादेश के बीच यातायात करते हैं. यहां से निर्यात का काम भी चालू हुआ है. फिलहाल एक निर्धारित रास्ते से ही यात्री आना-जाना कर रहे हैं एवं सामान लदे ट्रकों को बांग्लादेश भेजा जा रहा है. बांग्लादेश से भी ट्रक से यहां सामान आ रहे हैं.समस्या यहीं है. इन ट्रकों के पुख्ता चेकिंग की व्यवस्था नहीं है.
सामान लदे ट्रक से अवैध रूप से कुछ तस्करी की संभावना हमेशा बनी रहती है. कुछ दिनों पहले सोने की तस्करी का मामला इसी सीमा क्षेत्र में सामने आया था. इसम मामले में कूचबिहार के एक स्वर्ण व्यवसायी की गिरफ्तारी भी हुयी थी. उसके पास से करीब सवा करोड़ रुपये का अवैध सोना बरामद किया गया.
सूत्रों को कहना है कि वर्तमान में तस्कर तस्करी के कई नये-नये तरीके इजाद कर रहे हैं. कभी-कभी समान्य तलाशी में तस्करी का सामान बरामद करना असंभव हो जाता है. स्कैनर मशीन सहित आधुनिक व्यवस्था रहेगी तो सुरक्षा के कामकाज में सुविधा होगी. हालांकि स्थानीय शुल्क विभाग, पुलिस, बीएसएफ की ओर से बताया गया कि सामान ढोने वाले ट्रकों की आवाजाही एवं पासपोर्टधारी यात्रियों पर उनकी हमेशा कड़ी निगरानी रहती है. ट्रकों की भी तलाशी ली जा रही है.
इमिग्रेशन चेकपोस्ट संलग्न जीरो प्वाइंट इलाके में लोहे का कोई गेट नहीं है. शाम को बांस का बाड़ लगाकर बंद किया जाता है. जीरो प्वाइंट इलाके में बांग्लादेश का बुढ़ीमारी लैंडपोर्ट है. भारतीय ट्रक सामान लेकर बांग्लादेश प्रवेश करते हैं तो बुढ़ीमारी में ही अनलोडिंग होती है. इसी को देखकर इस सीमा पर चेकपोस्ट के आधुनिकीकरण की आवश्यकता बताई जा रही है. इनके मुताबिक आधुनिकीकरण से ही स्वाभाविक रूप से विभिन्न तकनीक का इस्तेमाल होगा. इससे जवानों को काम करने में सुविधा के साथ-साथ सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी. हालांकि इस पर स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है.
