माइक्रोचिप में लगा सेंसर उनकी लोकेशन का पता दे देते हैं. इससे उनपर नजर रखना आसान होगा. जानकारी के अनुसार यह माइक्रोचिप छोटे से ऑपरेशन के जरिये हाथी के शरीर में लगाया जाता है. सूत्रों के अनुसार चंदन गोरूमारा वनांचल में ही है. उसके म.ाइक्रोचिप से लोकेशन का पता लग रहा है. इसके पूर्व भी चंदन कई बार फरार हो गया था लेकिन बाद में वह लौट भी आया था. खबर लिखे जाने तक उसे खोजा नहीं जा सका था. सूत्र के अनुसार, अभी तक आठ कुनकी हाथियों के शरीर में माइक्रोचिप लगाने का काम किया गया है.
जानकारी के अनुसार, गुरुवार को चंदन नामक 20 साल का हाथी गोरुमारा के टुंडू वाच-टावर के नीचे आराम कर रहा था. अचानक वह जोर से चिघाड़कर अपनी रस्सी तुड़ाकर भाग गया. देखते-देखते वह घने जंगल में गुम हो गया. उसके बाद से ही उसकी तलाश की जा रही है. उल्लेखनीय है कि कई साल पहले ही उसे जलदापाड़ा नेशनल पार्क से उसे लाया गया था. उसके बाद शुरुआती प्रशिक्षण के बाद उसने कुनकी हाथी का काम शुरू कर दिया था. चंदन के महावत सनीचरवा उरांव ने बताया कि चंदन के भागने का यह पहला मौका नहीं है. छह माह पूर्व भी वह पीलखाना से भाग गया था. हर बार उसे दूसरे कुनकी हाथियों की मदद से उसे वापस ले आया गया था.
चंदन के अलावा गोरूमारा से भोलानाथ और उसके बाद अप्रैल में फूलमती भी पिलखाना से भागी थी. उन्हें वापस लाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी. इसी समस्या के हल के लिये वन विभाग हाथियों के शरीर में माइक्रोचिप लगाने का काम किया जा रहा है. उल्लेखनीय है कि इन कुनकी हाथियों का उपयोग पर्यटकों को भ्रमण कराने के लिए किया जाता है. ज्यादातर समय इन हाथियों को जंजीर से बांधकर रखा जाता है. कई बार इन्हें रस्सी से बांधकर रखा जाता है. कभी-कभी हाथी रस्सी तुड़ाकर भाग जाते हैं.
