दरअसल, खुट्टीमारी वनांचल का यह डॉन कोई और नहीं, बल्कि दबंग हाथी बायां गणेश है. अपने साथियों के साथ हमला करना जैसे उसके लिए बेइज्जती की बात थी, इसलिए वह हमेशा अकेले ही सर्जिकल स्ट्राइक करता था. इस हाथी का बाया दांत नहीं है, इसलिए इसका नाम बायां गणेश रखा गया. खुट्टीमारी एवं आसपास के इलाकों में नियमित छापामार हमला करके वह ग्रामीणों के लिए कुख्यात हो गया. वह घर में घुसकर चावल-दाल चट कर जाता एवं फसलों को नष्ट कर देता या फिर हड़िया पीकर नशे में झूमते हुए पेड़-पौधों को नष्ट कर देता था. बायां गणेश को जंगल में लौटाने के लिए वनकर्मियों को हमेशा परेशान होना पड़ता था.
मोराघाट जंगल के ‘डॉन’ का सुराग मिला
बानारहाट . मोराघाट वनांचल के ‘डॉन’ का पता आखिरकार वन कर्मियों ने लगा लिया. यह डॉन जहां जाता वहीं त्राहि-त्राहि मचा देता. कई महीनों से मोराघाट का खुट्टीमारी जंगल इस डॉन का ठिकाना बना हुआ था. हालांकि पिछले कुछ दिनों से इस डॉन का कोई पता नहीं मिल रहा था. दरअसल यह डॉन और कोई […]

बानारहाट . मोराघाट वनांचल के ‘डॉन’ का पता आखिरकार वन कर्मियों ने लगा लिया. यह डॉन जहां जाता वहीं त्राहि-त्राहि मचा देता. कई महीनों से मोराघाट का खुट्टीमारी जंगल इस डॉन का ठिकाना बना हुआ था. हालांकि पिछले कुछ दिनों से इस डॉन का कोई पता नहीं मिल रहा था. दरअसल यह डॉन और कोई नहीं बल्कि दबंग हाथी है जिसने ग्रामीणों के साथ-साथ वनकर्मियों की नाक में दम कर रखा था.
इस दबंग का उपद्रव अचानक शांत होने की बात वनकर्मी हजम नहीं कर पा रहे थे. चारों तरफ हाई अलर्ट जारी करने के बाद उसका पता मिला. वनकर्मियों को पता चला है कि इस डॉन ने अपना स्थान बदल लिया है. इसका वर्तमान ठिकाना नागराकाटा ब्लॉक का खयेरकाटा वनांचल है. इसके बाद से मोराघाट रेंज के वनकर्मियों ने राहत की सांस ली है.
विशेषज्ञों के मुताबिक ठंड शुरू होने से मोराघाट वनांचल में पानी सूखना शुरू हो गया है. रखरखाव के अभाव में जलाशयों की हालत दयनीय हो चुकी है. वनांचल में भोजन की कमी है. शायद इसीलिए बायां गणेश अपना ठिकाना बदलने को बाध्य हुआ होगा. खुट्टीमारी वनांचल से सटे चायनाडीपा के निवासी अनिल राय, शंभू अधिकारी ने बताया कि पिछले कई महीनों से बायां गणेश के अत्याचार से परेशान हो चुका था. वनकर्मियों के पहुंचने के पहले ही वह बड़ी होशियारी से अपना काम कर जाता था.
वनकर्मियों का एक वर्ग ने बताया कि रात को जब-तब इस बायां गणेश के अत्याचार से ग्रामीणों के साथ उन्हें भी परेशान होना पड़ता था. एक तरफ ग्रामीणों का विरोध तो दूसरी तरफ हाथी को खदेड़ने की परेशानी. कुल मिलाकर यह बायां गणेश विलेन बन चुका था. मोराघाट रेंज के रेंजर अजय घोष ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से ही मोराघाट के खुट्टीमारी संलग्न वनांचल में यह बायां गणेश रहा था. हाल में इन्हें सूचना मिली की वह वर्तमान में खयेरकाटा वनांचल में चला गया है. इस सूचना से एक तरफ वनकर्मियों ने कुछ हद तक राहत की सांस ली है.