दार्जिलिंग. गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के प्रमुख विमल गुरुंग ने पश्चिम बंगाल सीआइडी से लेकर जांच एनआइए को सौंपे जाने का स्वागत किया है. साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से कालिम्पोंग के पार्षद वरुण भुजेल की मौत की सीबीआइ जांच कराने की मांग की है. इसके अलावा पहाड़ पर मारे गये अन्य गोरखालैंड आंदोलनकारियों और पुलिस अधिकारी अमिताभ मल्लिक की मौत की भी सीबीआइ जांच की मांग की है. विमल गुरुंग ने एनआइए जांच शुरू करने के लिए भारत सरकार, खासकर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और दार्जिलिंग के सांसद सह केन्द्रीय मंत्री एसएस अहलुवालिया का आभार प्रकट किया है.
विमल गुरुंग के हस्ताक्षर से जारी गोजमुमो की विज्ञप्ति में कहा गया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय इसकी प्रक्रिया शुरू कर चुका है. पार्टी शुरू से ही यह कहती आ रही है कि पहाड़ पर हुए बम धमाकों के पीछे मोर्चा नेताओं को फंसाने की साजिश है. उसे बंगाल सरकार की जांच पर भरोसा नहीं है और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इन घटनाओं की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए. इसे लेकर विमल गुरुंग ने राजनाथ सिंह को पत्र भी लिखा था. उल्लेखनीय है कि विमल गुरुंग यह भी दावा कर चुके हैं कि जिस मुठभेड़ में बंगाल पुलिस के एसआइ अमिताभ मल्लिक की मौत हुई है, वह मुठभेड़ झूठी है. उनका कहना है कि बंगाल सरकार ही इस हत्या के पीछे है.
विज्ञप्ति के अनुसार, 30 अक्तूबर को भी गोजमुमो की ओर से केंद्रीय गृह मंत्रालय को फिर एक पत्र लिखा गया और बम धमाकों की उन सभी मामलों की एनआइए से जांच की मांग दोहरायी गयी, जिनमें बंगाल पुलिस ने मोर्चा नेताओं के खिलाफ यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया है.
पत्र में यह भी कहा गया कि दार्जिलिंग इलाका भू-राजनीतिक और भौगोलिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है. यह तीन देशों से लगा हुआ है और भारत के चिकेन नेक इलाके में पड़ता है. ऐसे क्षेत्र में बम धमाके होने और बड़ी संख्या में अत्याधुनिक आग्नेयास्त्र बरामद होने की अनदेखी नहीं की जा सकती. इसकी गहरी जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी हैं उन्हें पकड़ा जाना चाहिए.
भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से यह बहुत ही गंभीर मामला है. इसके अलावा ये घटनाएं देशभक्त गोरखा समुदाय पर दाग लगाने की कोशिश है, जिसने भारत माता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है. विमल गुरुंग ने एक बार फिर दोहराया है कि गोजमुमो शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक ढंग से आंदोलन कर गोरखालैंड राज्य हासिल करने के लिए 2007 से प्रयासरत है. मोर्चा ने कभी भी अपनी मांग के लिए असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक रास्ते को नहीं चुना. उनकी पार्टी पहाड़ की शांति भंग करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने की घोर निंदा करती है.
