सिलीगुड़ी: उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व शहर के एक विख्यात निजी अस्पताल पर चिकित्सा में लापरवाही बरतने तथा रोगी से अनावश्यक रुपये ऐंठने का आरोप लगा है. एक साधारण से इन्फेक्शन के जख्म को ठीक करने के नाम पर अस्पताल ने पीड़ित परिवार से एक लाख पांच हजार रुपये ऐंठ लिये. इलाज के लिए इस मजदूर परिवार ने अपना सब कुछ गिरवी रख दिया है. परिवारवालों ने घटना की शिकायत जिला स्वास्थ विभाग से लेकर राज्य की मुख्यमंत्री से भी की है.
सिलीगुड़ी के निकट माटीगाड़ा स्थित निमाइ जोत निवासी नारायण राय ने अपनी पत्नी को बीते 13 अक्तूबर को उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में भर्ती कराया था. उसकी पत्नी को बच्चा होने वाला था. भर्ती के दौरान मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने नॉर्मल डिलीवरी की बात बतायी. जबकि पांच दिन बाद 18 अक्टूबर को डॉक्टर ने बताया कि बच्चे का वजन काफी ज्यादा है. इसलिए सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए प्रसव कराया जायेगा. परिवार वालों की सहमति मिलने पर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर ने महिला का सीजर किया. महिला ने करीब साढ़े चार किलोग्राम की एक बच्ची को जन्म दिया. जिसके बाद महिला के पेट में इन्फेक्शन हो गया. दो दिन बाद महिला की स्थिति बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने जिम्मेदारी से हाथ खड़ा कर लिया. फिर परिवार वालों ने मरीज को माटिगाड़ा स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया. भर्ती कराते समय ही अस्पताल ने चालीस हजार रुपये जमा करा लिया.
आरोप है कि तीन दिनों में ही एक लाख पांच हजार का बिल बना दिया गया. इसके बाद फिर परिवारवालों ने मरीज को वहां से निकाल कर मेडिकल कॉलेज के निकट एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां तीन दिन की चिकित्सा के बाद मरीज ठीक हो गयी. इसके बाद परिवार ने उसके साथ हुई धोखाधड़ी के खिलाफ आवाज उठायी. बुधवार को सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में पत्रकारों को परिवार वालों ने पूरी घटना बतायी. नारायण राय ने बताया कि माटिगाड़ा के निजी अस्पताल ने प्रतिदिन पांच हजार रूपए के हिसाब से बेड चार्ज, 15 सौ रूपए डाक्टर की फीस ली गयी है. इसके अतिरिक्त पेट में हुए इंन्फेक्शन के कारण मरीज का ब्रेन टेस्ट, किडनी टेस्ट, हार्ट टेस्ट आदि जैसे अनावश्यक जांच के नाम पर पैसे लिए गए.
यह उनका पहला बच्चा है. नारायण स्वयं एक राज मिस्त्री है. अस्पताल ने अत्यधिक बिल बनाकर ऐसा कहर बरपाया कि वह अपनी मोटर साइकिल और पत्नी के गहने बेचकर भी भरपाई नहीं कर पाया. फिर उसने अधिक ब्याज देकर लोगों से 35 हजार रूपए का कर्ज लिया है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से लगायी मदद की गुहार
उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों द्वारा बरती गयी लापरवाही की वजह से उसे इस परेशानी का सामना करना पड़ा. उपर से निजी अस्पतालों की मनमानी ने कमर तोड़ कर रख दी है. उसने जिला मुख्य स्वास्थ अधिकारी, सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस कमिश्नरेट के माटिगाड़ा थाना, राज्य के पर्यटन मंत्री सहित राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी पत्र लिखा है. परिवार की मांग है कि सरकार उसके साथ न्याय करे और अस्पतालों द्वारा लिये गये अधिक रूपये वापस कराए. मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों द्वारा बरती जा रही लापरवाही पर भी कड़ी निगरानी रखने की मांग भी उसने की.
