मयनागुड़ी. : डुआर्स के गोरूमारा नेशनल पार्क से संलग्न जंगलों के हाथियों के झुंड अपने शावकों को वापस लेने से इनकार कर रहे हैं. इससे वन विभाग की चिंता बढ़ गयी है. यहां तक कि मादा हाथी भी अपने शावकों को वापस लेना नहीं चाह रही हैं. यह रुझान हाल के दिनों में बढ़ने से वन विभाग के अधिकारियों में चिंता व्याप्त है.
हाथी विशेषज्ञों का मानना है कि मादा हाथी गंध से अपने शावकों को पहचानती हैं, लेकिन एक बार यदि शावक झुंड से अलग हो जाता है और वह मनुष्य के संपर्क में चला जाता है तो उसे अपनाने से झुंड और मादा हाथी इनकार कर देते हैं. बीते दिनों छह रोज के अदंर ही गोरूमारा संलग्न विभिन्न इलाकों से तीन शावक मिले हैं.
इनमें से दो बहुत ही छोटे हैं. एक नवजात शावक की मौत भी हो चुकी है. गत 22 अक्तूबर को नागराकाटा के खेरकाटा के पास दो महीने का एक हस्ती शावक मिला था, जिसकी गत 28 अक्तूबर को मौत हो गयी.
गत 25 अक्तूबर को तड़के गोरूमारा अभयारण्य संलग्न रामसाई के जलढाका के किनारे भी एक शावक मिला. इसके बाद 27 अक्तूबर को नागराकाटा के हिला चाय बागान में एक माह उम्र का एक शावक मिला है. इस शावक का पैर तटबंध की जाली में फंस गया था. इसके चलते वह अपने झुंड से बिछुड़ गया था. वनकर्मियों ने इन शावकों को झुंड से मिलाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन उसमें उन्हें कामयाबी नहीं मिली. शावकों को फिलहाल गोरूमारा व जलदापाड़ा के पीलखाना में रखा गया है.
शावकों के इलाज के लिए मेडिकल बोर्ड
शावकों की शारीरिक अवस्था अच्छी नहीं होने के चलते उनके बेहतर इलाज के लिये मेडिकल बोर्ड बनाया गया है. सबसे बड़ी कठिनाई है इन शावकों का पालन-पोषण. इसके पूर्व कई शावकों की मौत हो चुकी है. इसलिए वन विभाग बड़ी सतर्कता के साथ शावकों की देखभाल कर रहा है. हाथी विशेषज्ञ पार्वती बरुआ ने बताया कि यह बेहद चिंताजनक है. इसके लिऐ अध्ययन किये जाने की जरूरत है. तभी इनके झुंड द्वारा नहीं अपनाने का रहस्य सुलझ सकता है.
भोजन की तलाश में आ जाते हैं हाथी
जंगलों के लगातार कम होने और उनके आसपास रिहाइशी इलाके बसने के चलते हाथी समेत वन्य प्राणियों के आहार की कमी हो रही है. डुआर्स के जंगल भी इसका अपवाद नहीं है. डुआर्स क्षेत्र में हाथियों के लिए आहार की समस्या गंभीर होती जा रही है. यही वजह है कि वे भोजन की तलाश में जंगल से खेतीवाले इलाकों में घुस रहे हैं और धान व मक्के की फसलों को चट कर रहे हैं. कहीं ऐसा तो नहीं कि हाथियों का यह झुंड अपने शावकों को भोजन की कमी के चलते बोझ मान बैठे हों. कई जानकारों की मानें तो इस आशंका में बल हो सकता है.
