सिलीगुड़ी. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश के बाद सिलीगुड़ी में महानंदा नदी में छठ पूजा आयोजन को लेकर उठे विवाद पर पर्यटन मंत्री गौतम देव के फैसले के बाद शहर के हिंदीभाषी समाज के वरिष्ठ समाजसेवियों ने आंदोलन नहीं करने का मन बना लिया. सामाजिक संगठन बिहारी कल्याण मंच ने सिलीगुड़ी थाना के मार्फत पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर यह साफ कर दिया है कि महानंदा में छठ पूजा के आयोजन को लेकर शहर में जो आंदोलन हो रहा है, उससे संगठन का कोई लेना-देना नहीं है.
साथ ही इस आंदोलन के दौरान अगर किसी तरह की भी कानून का उल्लंघन होता है तो उसकी जिम्मेदारी संगठन का नहीं है. वहीं आंदोलन से वरिष्ठ समाजसेवियों के पीछे हटने के बाद सिलीगुड़ी का युवा समाज छठ पूजा के आयोजन को लेकर एकजुट हो गया है.
शनिवार को श्री सेवा संघ सिलीगुड़ी इकाई के बैनर तले युवा समाज स्थानीय बाघाजतिन पार्क के सामने एकजूट हुए और विशाल रैली निकाली गयी. इस दौरान युवा आंदोलनकारियों ने एनजीटी और पर्यावरणप्रेमी सुभाष दत्ता के विरुद्ध जमकर नारा लगाया. साथ ही रैली सिलीगुड़ी नगर निगम के प्रशासनिक भवन के सामने पहुंचकर घेराव में तब्दील हो गयी.
युवा आंदोलनकारियों की अगुवायी कर रहे कार्यकर्ता शिवजी साह के नेतत्व में अनुप ठाकुर, संतोष यादव, राहुल कुमार शर्मा का एक प्रतिनिधि दल मेयर अशोक भट्टाचार्य से उनके दफ्तर में मुलाकात कर महानंदा नदी के किनारे परम्परागत तरीके से छठ पूजा कराने की गुजारिश की. बाद में श्री भट्टाचार्य खुद अपने दफ्तर से बाहर निकले और नीचे आकर युवा आंदोलनकारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि पहले उन्हें एक चिट्ठी दे. वह खुद चिट्ठी के माध्यम से डीएम को छठ पूजा आयोजकों का प्रस्ताव देंगे. श्री भट्टाचार्य ने भी युवा समाज से कहा कि छठ पूजा से कभी भी महानंदा नदी दूषित नहीं होती बल्कि महानंदा का सौंदर्य व गरिमा और अधिक बढ़ जाता है.
जेल भरों आंदोलन की दी चेतावनी
युवा समाज के आंदोलनकारियों ने महानंदा में छठ पूजा को लेकर उठे विवाद के बाद जेल भरों आंदोलन की चेतावनी भी दी है. यह चेतावनी आज के विरोध प्रदर्शन में शामिल माटीगाड़ा निवासी अशोक सहनी ने शासन-प्रशासन को दी है. उनका कहना है कि एनजीटी का मानना है कि केवल सिलीगुड़ी में ही छठ पूजा के वजह से महानंदा नदी दूषित हो जाती है. एनजीटी द्वारा जारी गाइड लाइन के तहत महानंदा नदी में पूजा के लिए घाट बनाना, केला गाछ लगाकर नदी का सौंदर्यीकरण करना, घाटों तक छठव्रतियों व श्रद्धालुओं के लिए अस्थायी पुल का निर्माण करना, नदी में छठव्रतियों व श्रद्धालुओं द्वारा भगवान सूर्य को अर्घ्य देना और नदी किनारे पंडाल बनाना पर्यावरण के दष्टिकोण से गैर-कानूनी है. कानून का उल्लंघन करनेवालों के विरुद्ध सख्त सजा का प्रावधान है. इसके तहत कानून न मानने वालों को तीन साल की जेल और 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लग सकता है. श्री सहनी का कहना है कि इतने सख्त कानून के बाद अगर शासन-प्रशासन एनजीटी के गाइड लाइन के तहत और सभी छठव्रतियों को नदी में परम्परागत तरीके से छठ पूजा की समुचित प्रबंध पूजा से पहले नहीं करती है तो सिलीगुड़ी का युवा समाज जेल भरों आंदोलन करेंगे. अन्य युवा आंदोलनकारियों ने भी सख्त लहजे में कहा है कि अपने धर्म की रक्षा के लिए हम हर कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं. वहीं, युवा समाजसेवी सुनील सिंह ने भी शासन-प्रशासन से अपील की है कि छठ पूजा करनेवाले अपने तौर-तरीके से ही पूजा कर सके इसके लिए पूरा इंतजाम करें.
रैली को लेकर खूब हुई जद्दोजहद
शहर में रैली निकाले जाने को लेकर युवा समाज और पुलिस प्रशासन के बीच घंटों तक जद्दोजहद हुई. विशाल रैली निकालने के लिए दिन के 11 बजे जब सिलीगुड़ी का युवा समाज बाघाजतिन पार्क के सामने इकट्ठा हुआ तभी सिलीगुड़ी मेट्रोपॉलिटन पुलिस के एसीपी (ईस्ट जोन-1) देनदुप शेर्पा भारी दलबल के साथ मौके पर पहुंच गये और बगैर प्रशासनिक अनुमति के शहर में रैली निकालने से रोकने का काफी प्रयास किया. इसे लेकर पूरे तीन घंटे तक युवा आंदोलनकारियों के साथ पुलिस की नौंक-झौंक हुई. आंदोलनकारी पुलिस की किसी भी बातों को मानने को कतई राजी नहीं थे. बाद में युवा जोश के सामने पुलिस पस्त हो गयी और विवश होकर शहर में रैली निकालने के बजाय केवल सिलीगुड़ी नगर निगम तक ही जाने की अनुमति दी. बाद में दोपहर दो बजे पुलिस की सुरक्षा के बीच रैली निगम तक पहुंची और शासन-प्रशासन के विरुद्ध प्रदर्शन किया. यहां उल्लेखनीय बात यह है कि शहर में रैली निकाले जाने को लेकर एक युवा समाजसेवी मिथिलेश साह ने सिलीगुड़ी थाना में आवेदन किया था जिसे कल रात को ही पुलिस ने खारिज कर दिया था. लेकिन इससे पहले ही आज 11 बजे रैली निकाले जाने का प्रचार-प्रसार सोशल मीडिया के मार्फत हो चुका था.
हिंदीभाषी समाज हाइकोर्ट में देगा चुनौती
महानंदा नदी में छठ पूजा करने के एनजीटी के गाइड लाइन के मद्देनजर हिंदीभाषी समाज हाइकोर्ट में चुनौती देगा. इसके लिए समुचित तैयारी भी कर ली गयी है. विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इसके लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं से मुलाकात कर राय-मशवरा भी लिया जा रहा है. जरूरत पड़ने पर एनजीटी के विरुद्ध सिलीगुड़ी का हिंदीभाषी समाज सुप्रीम कोर्ट तक भी जाने को तैयार है. यह कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए शहर के एक प्रतिष्ठित उद्योगपति पूरा खर्च वहन करने के लिए भी सबों को आश्वस्त कर चुके हैं.
आगे आये सिलीगुड़ी के कानूनविद
सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी में महानंदा नदी में छठ पूजा को लेकर नेशनल ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के गाइड लाइन और दार्जिलिंग जिला प्रशासन के फरमान के से उठे विवाद के बाद अब सिलीगुड़ी के कानूनविद भी आगे आने लगे हैं. सिलीगुड़ी लीगल सेल के बैनर तले शनिवार को जर्नलिस्ट क्लब में आयोजित प्रेस-वार्ता के दौरान शहर की पूर्व मेयर सह वरिष्ठ महिला अधिवक्ता गंगोत्री दत्त ने छठ पूजा से ठीक पहले डीएम के फरमान पर आपत्ति जतायी है. उनका कहना है कि छठ पर्व किसी एक व्यक्ति विशेष से नहीं बल्कि पूरे समाज के धार्मिक विश्वास के साथ जुड़ा है. यह पर्व केवल बिहारी समाज तक सीमित नहीं रह गया है. अपितु इसे पर्व को आज बंगाली, मारवाड़ी, नेपाली, सीख व मुस्लिम परिवार भी पूरे श्रद्धा के साथ मनाते हैं. ऐसे में छठ पूजा से ठीक पहले कानूनी आदेश जारी करना उचित नहीं है. उनका कहना है कि डीएम ने एनजीटी का हवाला देकर जो फरमान जारी किया है वैसा कुछ भी एनजीटी के गाइडलाइन में उल्लेख नहीं है.
