बागडोगरा. ढांचागत सुविधाओं की कमी तथा डाक्टरों व कर्मचारियों के अभाव में इन दिनों बागडोगरा प्राथमिक अस्पताल एक तरह से स्वयं बीमार है. ऐसे में इस अस्पताल में रोगियों की बेहतर चिकित्सा की उम्मीद नहीं की जा सकती. अस्पताल में इलाज कराने आने वाले रोगियों को मारे-मारे फिरना पड़ता है. इस इलाके में चार ग्राम पंचायत तथा कई चाय बागानों के निवासी चिकित्सा सेवा के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं. हर दिन सैंकड़ों मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं. तीन डॉक्टरों की सहायता से रोगियों की चिकित्सा की जाती है.
उसमें भी बीच-बीच में कोई न कोई डॉक्टर छुट्टी पर होते हैं. स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कई बार डॉक्टरों की कमी से नक्सलबाड़ी ग्रामीण अस्पताल से डॉक्टर आकर यहां रोगियों का इलाज करते हैं. अस्पताल की इस बदहाली के लिए इस अस्पताल के रोगी कल्याण समिति के चेयरमैन प्रशांत दत्त भी काफी नाराज हैं.
लोअर बागडोगरा अंचल तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष तथा रोगी कल्याण समिति के चेयरमैन प्रशांत दत्त का कहना है कि रोगियों को सही चिकित्सा नहीं मिले, यह बर्दाश्त करने योग्य नहीं है. इस अस्पातल की बदहाली की जानकारी वह राज्य स्वास्थ विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को देंगे. इधर अपर बागडोगरा ग्राम पंचायत, लोअर बागडोगरा ग्राम पंचायत, गोसाइपुर ग्राम पंचायत़, डाउमारी, सिकियाझोरा ग्राम पंचायत सहित इस इलाके के कई चाय बागानों के लाखों लोग इलाज कराने के लिए यहीं आते हैं. इस अस्पताल में कुल 12 बेडों की व्यवस्था है. हर दिन औसतन चार से पांच सौ मरीज यहां चिकित्सा कराने आते हैं. इस अस्पताल के निकट ही दो राष्ट्रीय राजमार्ग है. जहां अक्सर दुर्घटनाएं होती है. दुर्घटनाओं के शिकार लोगों की चिकित्सा का एकमात्र भरोसा भी यही अस्पताल है.
वीआइपी की नहीं पड़ती नजर
सिलीगुड़ी से बागडोगरा एयरपोर्ट जाने के क्रम में सड़क के किनारे ही इस बदहाल अस्पातल को देखा जा सकता है. हर दिन ही कई वीआईपी इस अस्पताल को देखते हुए बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचते हैं लेकिन इसकी स्थिति सुधारने की दिशा में कोई कार्यवायी नहीं की गयी. अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में यहां तीन डॉक्टर हैं, लेकिन आम तौर पर दो ही डॉक्टर अस्पताल में मौजूद रहते हैं. कोई न कोई डॉक्टर या तो छुट्टी में होता है या सरकारी काम से कहीं बाहर गया होता है. किसी न किसी डॉक्टर की तबीयत खराब रहती है. मात्र दो डॉक्टरों को चार सौ से पांच रोगियों को देखना पड़ता है. जाहिर हैं इससे रोगियों की चिकित्सा प्रभावित हो रही है. इससे रोगियों तथा उनके परिजनों में भी काफी रोष है. मंगलवार को डॉक्टरों के अस्पताल में नहीं रहने के कारण रोगियों ने विरोध प्रदर्शन किया. बाद में नक्सलबाड़ी से एक डॉक्टर को यहां भेजा गया. तब जाकर स्थिति सामान्य हुयी.
