उल्लेखनीय है कि कोई भी पटाखा वातावरण को प्रदूषित करता है, जबकि अधिक आवाजवाले पटाखे काफी प्रदूषण फैलाते हैं. इसे रोकने के लिए प्रत्येक वर्ष ही पुलिस प्रशासन व प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड द्वारा अभियान चलाया जाता है, लेकिन दीपावली की रात पटाखों की आवाज कानों तक पहुंचती है.
हांलाकि इस बार सिलीगुड़ी मेट्रोपॉलिटन पुलिस कमिश्नरेट ने अधिक आवाजवाले पटाखों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. वैसे हिंदू धर्म मान्यता के अनुसार भी देखा जाये, तो दीपावली की रात पटाखा जलाना तर्क संगत नहीं है, जबकि त्योहार के दिन पटाखा जलाना एक ट्रेंड बन गया है. 14 वर्ष का वनवास काट कर भगवान श्रीराम के अयोध्या वापस लौटने की खुशी में लोग घरों को दीये से सजाते हैं. इस दिन लोग अपने घरों, दुकानों, कारखानों आदि में सुख व समृद्धि के लिए लक्ष्मी की पूजा करते हैं. लक्ष्मी की पूजा के समय पटाखे जलाना कहां तक तर्क संगत है?
कालीपूजा को लेकर की गयी बैठक में शहर के पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार सिंह ने कहा कि तेज ध्वनिवाले पटाखों के खिलाफ अभियान तेज किया गया है. दीपावली व कालीपूजा के दौरान दुकानों में छिपाकर अधिक ध्वनिवाले पटाखे बेचे जाते हैं. इस बार छिपाकर पटाखा बेचनेवाले दुकानदार के साथ तेज ध्वनिवाले पटाखा जलानेवालों पर भी निगरानी रखी जा रही है. पकड़े जाने पर प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अनुसार कड़ी कार्रवाई होगी. कालीपूजा को लेकर भी शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. पूजा मंडप को सुरक्षा के साथ तैयार करने को कहा गया है.
