इस अवसर पर अध्यक्ष तथा प्राचार्य डॉ० सुजीत घोष ने हिंदी को माध्यम भाषा बनाने के पक्ष में अपनी बातें रखीं. विभागीय स्वागत में प्रो़ अजय कुमार साव ने कहा कि हिंदी के विकास के लिए साहित्यकार, बुद्धिजीवी, शिक्षण संस्थान को मिलकर काम करने की जरूरत है. मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित स्टेट बैंक के राजभाषा अधिकारी डॉ़ विवेक सिंह ने कहा कि आज भाषाई सरोकार के तहत हिंदी के साथ-साथ उन भाषाओं का भी अध्ययन जरूरी है.
साहित्यकार डॉ राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा कि भाषा-साहित्य का अध्ययन जीवन-बोध के लिए भी है, सिर्फ नौकरी के लिए नहीं. करन सिंह जैन ने आश्वस्त किया कि हिंदी के प्रति आज जन-संवेदना बढ़ी है. देवेन्द्र नाथ शुक्ल ने भाषा की समृद्धि के लिए भाषाई शुद्धता पर जोर दिया. शिक्षक दीपक शर्मा ने हिंदी के प्रति भाषाई सरोकार के सांस्कृतिक पहलू को ममृद्ध बनाने का प्रस्ताव दिया.
