इतना ही नहीं एनसीपी ने अलग गोरखालैंड बनाने की बात मांग तक कर दी थी. दार्जिलिंग में पार्टी के नेता अलग राज्य की मांग को लेकर जारी आंदोलन को चलाने के लिए गठित गोरखालैंड मूवमेंट को-ऑर्डिनेशन कमेटी (जीएमसीसी) के हिस्सा भी थे. अब एनसीपी ने गोरखालैंड की मांग का समर्थन नहीं करने का निर्णय लिया है. इसके साथ जिला नेताओं को भी गोरखालैंड मामले पर चुप रहने की हिदायत दी गयी है.
इस संबंध में पार्टी के जिला अध्यक्ष फैजल अहमद ने कहा कि पार्टी के आला नेताओं से गोरखालैंड की मांग का समर्थन नहीं करने के आदेश के बाद उन्होंने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. श्री अहमद ने अपनी तरफ से गोरखालैंड की मांग का समर्थन किया और कहा कि वह आने वाले दिनों में भी गोरखालैंड की मांग का समर्थन करते रहेंगे. उन्होंने आगे बताया कि पार्टी काफी दिनों से अलग राज्य की मांग से किनारा करने के दबाव बना रही थी. उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेताओं को समझाने की भी कोशिश की,लेकिन वह नहीं माने. उन्होंने पार्टी नेताओं को बताया कि दार्जिलंग पहाड़ के गोरखा अपने हक और पहचान की लड़ाई लड़ रहे हैं.
उनकी इस लड़ाइ का पार्टी ने समर्थन भी किया. इतनी दूर तक समर्थन करने के बाद पीछे हटना सही नहीं है. उसके बाद भी पार्टी के आला नेता नहीं माने और गोरखालैंड आंदोलनकारियों से दूरी बनाने के लिए कहा. वह ऐसा नहीं कर सकते और अंतिम क्षण तक गोरखालैंड आंदोलन का समर्थन करते रहेंगे. इधर,एनसीपी छोड़ने के बाद श्री अहमद के गोजमुमो में शामिल होने संभावना है. हांलाकि इस संबंध में वह खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं.
लेकिन माना यह जा रहा है कि वह गोजमुमो में जायेंगे और दिल्ली में बैठे गोजमुमो महासचिव रोशन गिरि से लगातार संपर्क में हैं. वह गोजमुमो अल्पसंख्यक सेल के अध्यक्ष बनाये जा सकते हैं. श्री अहमद इसके साथ ही इनदिनों भूमिगत रहे गोजमुमो सुप्रीमा विमल गुरूंग से भी संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं.इस संबंध में जब श्री अहमद से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि वह अभी किसी पार्टी में शामिल होने पर कोई फैसला नहीं कर सके हैं. वह पहले विमल गुरुंग तथा रोशन गिरि से बात करेंगे उसके बाद ही अपने भविष्य का फैसला करेंगे.
हांलाकि श्री पवार तबीयत खराब होने की वजह से रैली को संबोधित करने के लिए गांधी मैदान नहीं आ सके, लेकिन इससे पहले होटल में ममता बनर्जी ने उनसे मुलाकात की थी. उस समय जो खबरें आयी थीं, उसके अनुसार ममता बनर्जी ने उसके अनुसार ममता मनर्जी ने शरद पवार को साफ-साफ कहा था कि विधानसभा की चार सीटोंवाले पहाड़ को लेकर अलग राज्य का गठन नहीं हो सकता. उन्होंने यह भी बता दिया थ कि वह किसी भी कीमत पर बंगाल का विभाजन नहीं होने देंगी. पार्टी सूत्रों ने बताया कि उसी बैठक में ममता बनर्जी ने शरद पवार से अलग गोरखालैंड राज्य का समर्थन नहीं करने का अनुरोध किया था. लगता है अब जाकर बात बन गयी है.
